रविवार, 9 मई 2021

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दानवीर कर्ण की कहानी | danveer karn ki kahani

 कर्ण की कहानी  | Karn ki kahani

नमस्कार मित्रों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको महाभारत के एक मुख्य पात्र कर्ण के बारे में बताएंगे | 


कर्ण का जन्म | karn ka janm

शुरुआत करते हैं कर्ण के जन्म के विषय से - कर्ण के जन्म के विषय में कहा जाता है यह कुंती के कुँआरी अवस्था में पैदा हुए थे | कुंती की सेवा से प्रसन्न दुर्वासा ऋषि ने उन्हें एक मंत्र दिया था जिससे वे किसी का आह्वान करके पुत्र रत्न की प्राप्ति कर सकती थी | उत्सुकता वश और मन्त्र की सत्यता जांच करने के लिए कुंती ने सूर्य देव का आह्वान किया और जिसके फल स्वरुप कर्ण कुंती के गर्भ में आ गया | फिर कुंती की कुँआरी अवस्था में ही कर्ण कुण्डल और कवच के साथ पैदा हुआ |


Karn ki kahani
Karn ki kahani



 कुंती ने लोक लाज और समाज के भय के कारण कर्ण को एक टोकरी में रखकर नदी में बहा दिया | वह टोकरी सूत अधिरथ  और उनकी पत्नी राधा को मिली और उन्होंने उसे अपना बेटा मान कर उसका लालन-पालन किया | इसी वजह से कर्ण को सूत पुत्र तथा राधे कहा जाता है |


कर्ण की शिक्षा | karn ki shiksha 

कर्ण को शस्त्र विद्या की शिक्षा गुरु द्रोणाचार्य ने दी थी किन्तु कर्ण की उत्पत्ति के विषय में उन्हें संदेह होने की वजह से उन्होंने उसे ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना नहीं सिखाया | तब कर्ण परशुराम के पास गए और अपने को ब्राह्मण बताकर शस्त्र विद्या सीखने लगे | एक दिन किसी वजह से परशुराम को यह ज्ञात हो गया कि कर्ण ब्राह्मण नहीं है फिर परशुराम ने कर्ण को एक श्राप दिया कि जिस समय तुम्हें इस विद्या की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी उस समय तुम इस विद्या को भूल जाओगे |


कर्ण को श्राप | Karn ko shrap 

कर्ण को जीवन में दो श्राप मिले थे 

पहला श्राप इस प्रकार है कि एक समय कि बात है परशुराम कर्ण कि जंघा पर सर रखकर आराम कर रहे थे तभी थोड़े समय के बाद वहां एक बिच्छू आता है फिर कर्ण सोचता है कि अगर मैं बिच्छू को हटाने की कोशिश करता हूँ  तो गुरु की नींद भंग हो जाएगी  | वह उनकी नींद भंग नहीं करने देना चाहता था फिर उसने बिच्छू को हटाने के वजाये बिच्छू को डांक मारने दिया  और वह बिच्छू के डांक मारने का दर्द सहता रहा |

फिर जब गुरु परशुराम की नींद खुलती है और वे जब यह सब देखते हैं तो फिर उन्हें बहुत क्रोध आता है और वे कहते हैं कि इतनी सहनशीलता केवल एक क्षत्रिये में हो सकती हैं और तुम झूठ बोल कर मुझसे ये सब सीख रहे थे इसलिए मैं तुम्हे श्राप देता हूँ कि जब तुम्हे मेरे द्वारा सिखाई गयी विद्या की सबसे ज्यादा जरुरत होगी तो तुम उस समय ये विद्या भूल जाओगे | 

इतना सब हो जाने के बाद कर्ण गुरु परशुराम को समझाता है की वह खुद नहीं जनता कि वह किस वंश का है तब परशुराम को पछतावा होता है लेकिन दिया गया श्राप वापस नहीं लिया जा सकता तो फिर परशुराम अपना धनुष कर्ण को दे देते हैं |


फिर कुछ वर्षों के बाद 

कर्ण गलती से एक ब्राह्मण की गाय को मार देते हैं  फिर उस ब्राह्मण ने कर्ण को श्राप दिया था कि जिसे तुम मारना चाहते हो तुम उसी के हाथों मारे जाओगे  

इस प्रकार कर्ण को दो श्राप मिले थे |


कर्ण की दुर्योधन से मित्रता | Karn ki duryodhan se mitrta 

अगर हम बात करें दुर्योधन और कर्ण की मित्रता के बारे में मित्रों तो फिर आपको बताना चाहूंगा कि कर्ण शुरुआत से ही अर्जुन के प्रतिद्वंदी थे जिसकी वजह से उसकी दुर्योधन से मित्रता हो गई थी |


कर्ण का विवाह | Karn ka vivah 

एक बार द्रौपदी के स्वयंवर के लिए राजा गण राजा द्रुपद के यहां एकत्र हुए थे | द्रौपदी के स्वयंवर में एक प्रतियोगिता राखी गयी थी जिसके अनुसार जो भी राजा धनुष उठाकर मछली के  प्रतिबिम्ब को देख कर मछली की आँख में निशाना लगाएगा द्रौपदी का विवाह उसी से होगा | उस सभा में किसी ने भी उस धनुष को हिला तक नहीं पाया | लेकिन अर्जुन से पूर्व कर्ण ने उस धनुष को उठा लिया था पर द्रौपदी ने सूतपुत्र होने की वजह से उनसे विवाह करने से मना कर दिया था | 

इसकी वजह से कर्ण ने विशेष रूप से अपने आपको काफी अपमानित समझा |  कर्ण का विवाह पद्मावती नाम की कन्या से हुआ था

कर्ण का दानवीर स्वभाव  | Karn ka danveer swabhav

कर्ण ने पांचों पांडवों का वध करने का संकल्प लिया था पर माता कुंती के कहने पर उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा अर्जुन तक ही सीमित कर दी थी | कर्ण को दानवीर भी कहा जाता है उनकी दानवीर होने के काफी किस्से हैं  | कर्ण के इस दानवीर स्वभाव को देखकर इंद्र उनके पास उनका कवच और कुंडल मांगने गए थे फिर कर्ण ने उन्हें कवच और कुंडल दे दिए थे |


फिर इंद्र ने उन्हें एक बार प्रयोग करने के लिए अपनी एक अमोघ शक्ति दे दी थी | इससे किसी का भी वध किया जा सकता था | कर्ण उस शक्ति का प्रयोग अर्जुन पर करना चाहते थे किन्तु दुर्योधन के कहने पर उन्होंने उस शक्ति का प्रयोग भीम के पुत्र घटोत्कच पर किया था |


महाभारत युद्ध से पहले भगवान् कृष्ण कर्ण  के पास जाते हैं और उसे उसके जन्म की सच्चाई बताते हैं और कर्ण  को समझाते हैं कि उसे पांडवों यानी कि अपने भाइयों की तरफ से युद्ध लड़ना चाहिए | लेकिन कर्ण ने इसका प्रतिरोध करके अपनी सत्य निष्ठा और अपनी सच्ची मित्रता का परिचय दिया |


कर्ण का कुंती को वचन | Karn ka kunti ko vachan

युद्ध होने से पहले कुंती का मन व्याकुल हो उठा, वे नहीं चाहती थी कि कर्ण कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ें और कर्ण का पांडवों के साथ युद्ध हो | इसलिए वे कर्ण को समझाने के लिए कर्ण के पास गई जब कुंती कर्ण के पास गई तो कर्ण उनके सम्मान में खड़े हो गए और उनसे कहा कि आप यहां पहली बार आयी हैं तो इस राधे का सम्मान स्वीकार करें | फिर कुंती ने कर्ण से कहा कि तुम राधे नहीं हो मैं तुम्हारी मां हूं लोक लाज और समाज के भय के कारण मैंने तुम्हें त्याग दिया था |


 तुम पांडवों के बड़े भाई हो इसलिए तुम्हें कौरवों के साथ नहीं बल्कि अपने भाई पांडवों के साथ रहना चाहिए | मैं नहीं चाहती कि भाइयों में परस्पर युद्ध हो | मैं चाहती हूं कि तुम पांडवों के पक्ष में रहो और बड़े भाई होने के नाते राज्य के अधिकारी हो | फिर कुंती ने कहा कि मैं चाहती हूं कि तुम युद्ध जीत कर राजा बनो | तब कर्ण ने कहा माता आपने मुझे त्यागा था, क्षत्रियों के कुल में पैदा होने के बाद भी मैं सूत पुत्र कहलाता हूं | सूत पुत्र कहलाने के कारण द्रोणाचार्य ने मेरा गुरु बनना स्वीकार नहीं किया तथा दुर्योधन ही मेरे सच्चे मित्र हैं | मैं उनका उपकार और मित्रता नहीं भूल सकता किंतु आपका मेरे पास आना व्यर्थ नहीं जाएगा क्योंकि आज तक मेरे पास आया हुआ कोई भी इंसान खाली हाथ नहीं गया है |


 मैं आपको वचन देता हूं कि मैं अर्जुन के सिवाय आपके किसी भी पुत्र पर अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग नहीं करूंगा | मेरा और अर्जुन का युद्ध तो होना ही है और हम दोनों में से किसी एक की मृत्यु निश्चित है | मेरी प्रतिज्ञा है कि आप पांच पुत्रों की ही माता बनी रहेंगी |





कर्ण की मृत्यु | Karn ki mrityu

फिर महाभारत के युद्ध में गुरु द्रोणाचार्य के मारे जाने के बाद युद्ध के १६वे  दिन कर्ण को कौरवों की सेना का सेनापति बनाया गया | अर्जुन को छोड़ कर उसने अन्य पांडवों को जीता किंतु कुंती के अनुरोध की वजह से उसने किसी का भी वध नहीं किया | युद्ध के १७वे  दिन कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धस जाता है फिर कर्ण अपना धनुष रखकर रथ के पहिये को निकालने लगता है | उसी समय भगवान कृष्ण अर्जुन से कर्ण का वध करने को कहते हैं | फिर अर्जुन कर्ण का वध कर देते हैं इस तरह एक महान धनुर्धर , दानवीर योद्धा की मृत्यु हो जाती है |


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मंगलवार, 4 मई 2021

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महाभारत के युद्ध में बलराम जी शामिल क्यों नहीं हुए ?

 महाभारत युद्ध में बलराम ने भाग क्यों नहीं लिया था ?

नमस्कार मित्रों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि बलराम ने महाभारत का युद्ध क्यों नहीं लड़ा अर्थात  मेरे कहने का मतलब है कि बलराम जी महाभारत के युद्ध में शामिल क्यों नहीं हुए थे ? आज इसी के बारे में बताएंगे |

 मित्रों, आप भी सोचिए कि आखिर क्यों बलराम जी ने अपने भाई कृष्ण भगवान के साथ महाभारत का युद्ध नहीं लड़ा ? ऐसी क्या वजह रही होगी और अगर बलराम जी कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ना चाहते थे तो उन्होंने कौरवों की तरफ से भी युद्ध नहीं लड़ा, ऐसा क्यों ?

बलराम ने महाभारत का युद्ध क्यों नहीं लड़ा ?


 मित्रों, आपको यह तो पता ही होगा कि भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जो शेषनाग के अवतार थे, कंस द्वारा देवकी की 6 संतानों के वध के बाद शेषनाग बलराम के रूप में देवकी की कोख से पैदा हुए और उनके जन्म से कुछ समय पहले ही वासुदेव की पहली पत्नी रोहिणी जी वासुदेव और देवकी से मिलने कारागार गई तथा उन्होंने अपनी योग शक्ति से बलराम को अपने गर्भ में सुरक्षित कर लिया |



mahabharat ke yudh me balram ne bhag kyun nahin liya
Balram ne mahabharat ka yudh kyun nahin lada ?



 मित्रों, वैसे बलराम जी को कौन नहीं जानता - सभी जानते हैं | भगवान कृष्ण जहां अपने शांत स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे और वहीँ  बलराम अपने क्रोध स्वभाव के लिए, वैसे भी बलराम शेषनाग के अवतार थे और नागवंशी क्रोधी स्वभाव के जाने जाते हैं | बलराम जी ने यदुवंशियों के संहार के बाद अपना देह का समुद्र तट पर त्याग दिया था और अपने धाम लौट गए थे |

 बलराम की शक्ति जानते हुए जरासंध को बलराम ही अपने लायक प्रतिद्वंदी नजर आते थे अगर भगवान कृष्ण की योजना जरासंध का वध भीम द्वारा करवाना ना होता तो फिर बलराम ही जरासंध का वध कर देते | बलराम अत्यधिक  बलशाली थे फिर भी उन्होंने महाभारत के युद्ध में ना लड़ने का निर्णय  क्यों किया | इसकी वजह क्या थी ?

आखिर ऐसा क्या कारण था जिसकी वजह से बलराम युद्ध करने के स्थान पर तीर्थ यात्रा चले गए |

मित्रों, आपको यह तो पता ही होगा कि महाभारत के युद्ध में हर जगह के छोटे बड़े राजाओं ने भाग लिया | कौरवों के साथ श्री कृष्ण की नारायणी सेना सहित 11 अक्षौहिणी सेना थी वही पांडवों के पास केवल 8 अक्षौहिणी सेना थी और निशस्त्र भगवान् कृष्ण थे | 

तो ऐसे में बलराम ने युद्ध ना करने का निर्णय लिया और तीर्थ यात्रा पर निकल गए और तो और उन्होंने भगवान कृष्ण को भी यह सुझाव दिया कि वे युद्ध में शामिल ना हो क्योंकि दोनों ही पक्ष हमारे संबंधी हैं और किसी एक का पक्ष लेना दूसरे के साथ अन्याय करना होगा दोनों ही पक्ष अधर्म कर रहे थे | अगर हम इसमें शामिल हुए तो वह भी अधर्म कहलाएगा और बलराम भैया दुर्योधन को वचन दे चुके थे कि कृष्ण युद्ध में शस्त्र नहीं उठाएंगे इसीलिए भगवान कृष्ण ने उनके वचन का मान रखते हुए युद्ध में बिना शस्त्र  के भाग लिया और अर्जुन के सारथी बन गए | 

 भगवान कृष्ण ने बलराम को भी समझा दिया कि धर्म स्थापना के लिए युद्ध का होना बहुत ज्यादा आवश्यक है और रही बात संबंधों की तो एक पक्ष सेना को चुने और एक पक्ष मुझे चुन ले | जब दुर्योधन को यह पता चला कि कृष्ण भगवान युद्ध में शस्त्र नहीं उठाएंगे तो दुर्योधन ने सेना का ही चुनाव किया | लेकिन भगवान कृष्ण ने निशस्त्र ही पांडव सेना को विजय दिलवा दी | इस प्रकार उन्होंने बलराम के वचन का मान रखा और युद्ध पूरा किया |

मित्रों, एक प्रश्न धर्म का होता है और जहां धर्म होता था भगवान कृष्ण वहां खड़े हो जाते थे चाहे उनके सामने उनके अपने ही क्यों ना हो | मैं आपको बताना चाहूंगा कि ग्रंथों में एक घटना का वर्णन मिलता है कि जिसमें कि युद्ध से 1 दिन पूर्व बलराम जी पांडवों की छावनी में पहुंचे और उन्हें देख पांडव पक्ष में सभी लोग काफी प्रसन्न हुए और सभी पांडवों ने उनका स्वागत किया और सबका अभिवादन स्वीकार करते हुए बलराम युधिष्ठिर जी के पास बैठे |

सबको यह लग रहा था कि बलराम जी ने अपना निर्णय बदल लिया होगा | लेकिन बलराम बहुत ही दुखी मन से कहने लगे के इस युद्ध में मुझे कोई रुचि नहीं है | सभी लोग आपस में लड़कर मूर्खता कर रहे हैं और मेरे लिए पांडव और कौरव दोनों ही प्रिय हैं |इसलिए मैं युद्ध में भाग नहीं लूंगा, नहीं तो यह अन्याय होगा | भीम और दुर्योधन दोनों ही मुझसे गदा सीख चुके हैं |

 दोनों ही मेरे अपने हैं और इन दोनों को आपस में लड़ते हुए देख कर मुझे अच्छा नहीं लगेगा | फिर बलराम जी बोले, इसलिए मैं तीर्थ यात्रा पर जा रहा हूं यह कहे कर बलराम ने सब से विदा ली और तीर्थ यात्रा पर निकल गए | मित्रों यही कारण था कि जिसकी वजह से बलराम जी ने महाभारत के युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था मित्रों अब तो आप समझ चुके होंगे कि महाभारत के युद्ध में बलराम ने भाग क्यों नहीं लिया था |

जय श्री कृष्णा ||

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सोमवार, 12 अप्रैल 2021

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Shri Krishna के देह त्याग के बाद उनके सुदर्शन चक्र ( Sudarshan Chakra ) का क्या हुआ ?

 सुदर्शन चक्र | Sudarshan Chakra


नमस्कार मित्रों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको Sudarshan Chakra से जुड़ी बातें बताएंगे कि भगवान Krishna के देह त्याग करने के बाद उनका सुदर्शन चक्र कहां गया और आज आपको सुदर्शन चक्र से जुड़ी काफी रोचक जानकारी प्राप्त होंगी |

आज के समय में Sudarshan Chakra के बारे में काफी लोगों ने सुना है | सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का एक ऐसा अस्त्र है जिसका प्रहार कभी खाली नहीं जाता | सुदर्शन चक्र की खासियत यह थी कि अगर एक बार भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र का वार कर दिया तो वह सुदर्शन चक्र अपना काम पूरा करके ही भगवान विष्णु के पास वापस आता था | हम सभी लोग यह भी जानते हैं कि सुदर्शन चक्र भगवान krishna के भी पास था भगवान कृष्ण विष्णु के ही अवतार थे |


Sudarshan Chakra
Sudarshan Chakra



 भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से काफी ऐसे काम किए पृथ्वी पर, जो कि पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए काफी जरूरी थे | मित्रों आज के समय में ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि भगवान कृष्ण के देह त्याग करने के बाद उनके सुदर्शन चक्र का क्या हुआ और कहाँ गया सुदर्शन चक्र |

Shri Krishna के देह त्याग के बाद उनके Sudarshan Chakra का क्या हुआ ?


मित्रों, महाभारत काल में भी Sudarshan Chakra का जिक्र बहुत बार हुआ है | सबसे पहले जिक्र हुआ था शिशुपाल की कहानी के दौरान, शिशुपाल भगवान कृष्ण का ही कोई रिश्तेदार था लेकिन भगवान कृष्ण ने उसे वचन दिया था कि वह उसकी १०० गलतियों को  माफ करेंगे और फिर जैसे ही शिशुपाल ने १०१ गलती की फिर भगवान् krishna ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया |

 दूसरी बार सुदर्शन चक्र का जिक्र हुआ था इंद्र और अर्जुन के युद्ध के दौरान, इंद्र ने गुस्से में अर्जुन के ऊपर बज्र से प्रहार कर दिया था और इधर अर्जुन ने भी दिव्यास्त्र से इंद्र के ऊपर प्रहार कर दिया था | फिर भगवान कृष्ण ने दोनों के प्रहार को रोकने के लिए सुदर्शन चक्र चलाया और दोनों का ही वार खाली चला गया | 

इससे यह पता चलता है कि भगवान श्री कृष्ण ने जिस किसी कार्य के लिए सुदर्शन चक्र का प्रयोग करते थे वह कार्य जरूर पूरा होता था | अब बात आती है कि सुदर्शन चक्र गया कहाँ , यह सब जानने के लिए पहले तो हमें यह अच्छी तरह से जानना होगा कि सुदर्शन चक्र क्या था ?

मित्रों शिव पुराण के अनुसार भगवान् शिव ने भगवान् विष्णु को सुदर्शन चक्र एक वरदान के रूप में दिया था और कहा था कि आप इसकी मदद से ही सारी दुनिया का पालन करेंगे | भगवान विष्णु ने उनसे यह सुदर्शन चक्र लिया और इस सृष्टि का उद्धार किया |

लेकिन अगर हम ऋग्वेद की तरफ आते हैं तो ऋग्वेद में इस चीज का उल्लेख है कि Sudarshan Chakra एक ऐसी शक्ति है जो भगवान विष्णु यानी कि भगवान कृष्ण के पास थी जिसके इस्तेमाल करने से भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण  समय को रोककर समय के के साथ खेलकर काफी चीजें बदल देते थे | वे समय को रोककर किसी भी असुर या दानव को असहाय कर देते थे और फिर उसकी पराजय हो जाती थी |

 ऋग्वेद के अनुसार सुदर्शन चक्र एक ऐसी शक्ति बताई गई है जिसकी मदद से भगवान कृष्ण समय को रोक देते थे और समय से आगे भी चले जाते थे | 

समय को रोक देने वाला जिक्र महाभारत के युद्ध के दौरान भी हुआ था | भगवान कृष्ण ने समय को रोककर अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था महाभारत युद्ध के समय भगवान krishna ने समय को रोककर युद्ध के दौरान ही भीष्म पितामह को सही ज्ञान दिया था |

 तो दोस्तों हम यह मान सकते हैं कि सुदर्शन चक्र एक ऐसी शक्ति थी जिसकी मदद से भगवान कृष्ण इस तरह के काम करते थे | हमारे लिए यह बिल्कुल सही तरीके से समझ पाना मुश्किल है क्योंकि हम में से किसी ने भी यह देखा नहीं है | 

अगर दूसरे शब्दों में कहें और पुराणों की मानें तो हम यह कह सकते हैं कि सुदर्शन चक्र केवल एक अस्त्र या शस्त्र नहीं था बल्कि वह एक ऐसी शक्ति थी  जिसका उपयोग भगवान् विष्णु या उनके अवतार कर सकते थे | इसीलिए भगवान krishna के देह त्याग करने के बाद उनकी यह शक्ति यानी कि सुदर्शन चक्र पृथ्वी में समा गया था |

पुराणों में यह उल्लेख भी मिलता है कि Sudarshan chakra वापस आएगा और यह तब वापस आएगा जब भगवान कल्कि पृथ्वी पर अवतार लेंगे | भगवान कल्कि अवतार के साथ भगवान बजरंगबली और भगवान परशुराम भी इस पृथ्वी पर हम लोगों के सामने आएंगे और भगवान कल्कि का प्रशिक्षण करेंगे | फिर उसके बाद सुदर्शन चक्र का उपयोग करके भगवान कल्कि इस दुनिया से पापियों का वध करेंगे |

भगवान् कल्कि फिर एक बार सुदर्शन चक्र का प्रयोग करके इस धरती से पाप का विनाश करेंगे |

मित्रों आशा करता हूँ कि आपको Sudarshan Chakra से जुड़ी काफी अच्छी जानकारी मिल चुकी होगी | अगर आपको हमारी ये जानकारी पसंद आयी है तो फिर इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें |

मित्रों अगर आपके मन में हमारे इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सवाल या कोई सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं |

धन्यवाद 

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गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

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वायु प्रदूषण : कारण, प्रभाव और समाधान | Air Pollution in Hindi

 

वायु प्रदूषण | Air Pollution in Hindi

मित्रों, आज के समय में हमारी पृथ्वी पर काफी तरह के समस्या बढ़ती जा रही हैं उन्ही समस्याओं में से एक है वायु प्रदूषण | दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि vayu pradushan क्या है और इसके कारण, प्रभाव और समाधान के बारे में बताएंगे | 

वायु प्रदूषण क्या है ? | Air Pollution in Hindi 

मित्रों, आपको ये तो पता ही होगा कि वायु कई गैसों का मिश्रण हैं इसमें सभी गैसें एक उचित अनुपात में होती हैं | जब इसी मिश्रण में जब विभिन्न प्रकार के प्रदूषक आ जाते हैं तो वह इस मिश्रण में गैसों के अनुपात को असंतुलित कर देते हैं , यही वायु प्रदूषण कहलाता हैं |


Air pollution in Hindi
Air pollution in Hindi



अगर आसान शब्दों में कह तो हम ये कह सकते हैं कि वायु में विभिन्न प्रदूषकों का आ जाना वायु प्रदूषण कहलाता हैं |

वायु प्रदूषण के कारण | Causes of Air Pollution in Hindi

अब हम आपको विस्तार से वायु प्रदूषण के मुख्य कारण बताएंगे |

१. जनसँख्या वृद्धि 

जनसंख्या वृद्धि भी एक कारण है वायु प्रदूषण का क्योंकि जैसे जैसे जनसंख्या बढ़ती जा रही है वैसे वैसे हम लोग ज्यादा से ज्यादा इर्धन तथा वाहनों का प्रयोग करते जा रहे हैं जो कि vayu pradushan का मुख्य कारण है |

२. बढ़ते उद्योग 

औद्योगिक कारखानों के द्वारा सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड आदि विषैली गैस निकलती हैं तथा वायुमंडल को प्रदूषित करती हैं | उसी तरह जैसे जैसे औद्योगिक कारखाने बढ़ते जा रहे हैं वैसे वैसे vayu pradushan भी बढ़ता जा रहा है |


३. वनों की अंधाधुंध कटाई 

आज के समय में वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है जो कि एक कारण है vayu pradushan के बढ़ने का क्योंकि पेड़ पौधे वायु गैसों को संतुलित रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं |


४.शहरीकरण 

शहरीकरण भी वायु प्रदूषण का एक कारण है क्योंकि घरों में प्रयुक्त होने वाले प्लास्टिक, रंग रोगन, रसायन व पेंट आदि  भी वायु को प्रदूषित करते हैं | फ्रिज तथा एयर कंडीशन से निकलने वाली गैस  भी वायु को प्रदूषित करती है और vayu pradushan को बढ़ाती हैं |


५. वाहनों के इर्धन से निकलने वाला धुआं 

विभिन्न प्रकार के वाहनों के इर्धन से निकलने वाला धुआं भी वायु को प्रदूषित करता है | जैसे विभिन्न प्रकार के वाहनों कार , ट्रक, रेलगाड़ी, वायुयान, जलयान आदि से प्रतिदिन विषैले पदार्थ , धुआं तथा गैस निकलती है तथा वायुमंडल में फैलती रहती हैं और उससे vayu pradushan बढ़ता जाता है |


६. कृषि रसायनों का प्रयोग 

खेतों में छिड़के जाने वाले कीटनाशक व विभिन्न प्रकार के रसायन भी वायु को प्रदूषित करते हैं आपने देखा होगा कि आजकल खेतों में काफी ज्यादा अलग-अलग प्रकार के कीटनाशक इस्तेमाल किए जाते हैं जो कि हमारे भाइयों के वायु को प्रदूषित करते हैं |


७. परमाणु परीक्षण

परमाणु परीक्षण से भी vayu pradushan होता है और यह भी एक कारण है वायु को प्रदूषित करने का |


८. तूफानों के दौरान उड़ने वाली धूल

जब भी कोई बड़ा तूफ़ान आता है तो वह विषैले कणों को वातावरण में फैला देता है | जिससे कि vayu pradushan होता है |


९. जंगलों में लगी आग से उत्पन्न धुआं 

मित्रों, वनों में आग लगने से भी काफी ज्यादा vayu pradushan होता है क्योंकि जब भी वन में आग लगती है तो फिर कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और राख के कण पूरे वातावरण में फैल जाते हैं और यह कण वायु को प्रदूषित कर देते हैं |


वायु प्रदूषण का प्रभाव | Effect of Air pollution in Hindi

अब हम आपको वायु प्रदूषण की वजह से होने वाले प्रभाव के बारे में बताएंगे |

मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव 

वायु प्रदूषण का मनाव स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है | vayu pradushan की वजह से आजकल इंसानों में विभिन्न  प्रकार की घातक बीमारियां बढ़ती जा रही हैं |

अम्ल वर्षा 

वायु प्रदूषण की वजह से कई विषैले पदार्थ वायुमंडल में आ जाते हैं जो कि कभी कभी अम्ल वर्षा का कारण भी बन जाते हैं | अम्ल वर्षा से फसलों के साथ साथ मानव जीवन पर भी काफी बुरा असर पड़ता है |

पृथ्वी के तापमान का बढ़ना 

जैसे-जैसे वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे पृथ्वी का तापमान भी बढ़ता जा रहा है क्योंकि वायु प्रदूषण से पृथ्वी के वायुमंडल में काफी ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा बढ़ती जा रही है जिसकी वजह से हमारी पृथ्वी पर तापमान बढ़ता जा रहा है |

ओजोन परत को नुकसान

वायु प्रदूषण के बढ़ने की वजह से ओजोन परत को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है |

प्राकृतिक जलवायु में बदलाव 

मित्रों, जैसे-जैसे वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है उसी तरह हमारे प्राकृतिक जलवायु में बदलाव होता जा रहा है इस वायु प्रदूषण की  वजह से प्राकृतिक जलवायु में कई तरीके के बदलाव आ चुके हैं |

पेड़ पौधों पर प्रभाव 

वायु प्रदूषण की वजह से हमारे पेड़ पौधों पर भी उसका काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है | वायु प्रदूषण की वजह से काफी पेड़ पौधे और फसल खराब हो जाती है |

वायु प्रदूषण का समाधान | Solution of Air pollution in Hindi

अब हम आपको वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान के बारे में बात करेंगे |
जैसा कि आप सब जानते हैं कि वायु प्रदूषण हमारी पृथ्वी के लिए बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है | 

इस समस्या से निपटने के लिए हमें कुछ कड़े कदम उठाने होंगे | 
सबसे पहले तो वनों की हो रही अंधाधुंध कटाई को रोकना चाहिए | इसके लिए सरकार और प्राइवेट संस्था को जुड़कर काम करना चाहिए तथा हर एक इंसान को ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने चाहिए |

हमें शहरीकरण की प्रक्रिया को रोकना चाहिए इसके लिए सरकार को गांव और कस्बों में भी रोजगार और कुटीर उद्योगों का तथा अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराना चाहिए |

कारखानों को शहरी क्षेत्र से दूर स्थापित करना चाहिए तथा ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे कि धुआं तथा विषैले पदार्थ ज्यादा न निकलें |
हमें ज्यादातर इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग बढ़ाना होगा जिससे कि धुआं न निकले |

सौर ऊर्जा की तकनीक को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए |
इन सभी बातों को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल करके बच्चों को इसके बारे में जानकारी देनी चाहिए |

Conclusion ( Air pollution in Hindi )

मित्रों आशा करता हूँ कि आपको हमारा ये आर्टिकल " Air Pollution in Hindi " पसंद आया होगा और आपको अच्छी जानकारी प्राप्त हुई है | अगर आपके मन में इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सवाल या सुझाव हो तो फिर आप हमें जरूर बताइयेगा |

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गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

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जल प्रदूषण : कारण, प्रभाव और समाधान | Water Pollution in Hindi

 जल प्रदूषण | Water Pollution in Hindi, Causes, Effects and Solutions

जल हमारे जीवन के लिए बहुत ही ज्यादा जरुरी है और इसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते | मित्रों, आज के इस आर्टिकल " Water Pollution in Hindi " में हम आपको Jal pradushan kya hai  उसके कारण , प्रभाव तथा समाधान के बारे में बताएंगे | 

जल प्रदूषण क्या है ? | Water Pollution in Hindi 

मित्रों, अब हम आपको बताएंगे कि जल प्रदूषण क्या होता है ?



Water Pollution in Hindi
Water Pollution in Hindi



जब पानी में विषैले पदार्थ घुल जाते हैं या जल में पड़े रहते हैं तो वह परिणाम स्वरुप जल को दूषित कर देते हैं, यही Jal Pradushan कहलाता है | जल प्रदूषण की वजह से पानी की गुणवत्ता कम हो जाती है और वह इस्तेमाल के लायक भी नहीं रहता है |

जल प्रदूषण के कारण | Causes of Water Pollution in Hindi

Jal Pradushan के कई कारण हैं | अब मैं आपको एक एक करके जल प्रदूषण के कारण बताऊंगा |

1. नालियों के गंदे पानी को जल श्रोतों में गिराना 

मित्रों, Jal Pradushan का मुख्य कारण ये है कि हमारे घरों का जो गन्दा पानी होता है वह नाली में जाता है | फिर वह गन्दा पानी नाली के जरिये किसी न किसी जल स्रोत में गिर जाता है जैसे कि कोई नदी या तालाब आदि | फिर यह गन्दा पानी हमारे तालाब तथा नदियों के जल को प्रदूषित कर देता है और इस तरह जल प्रदूषण होने लगता है |

2. फैक्ट्री के बेकार पदार्थों को नदियों और तालाबों में बहाना 

दूसरा जो मुख्य कारण है Jal Pradushan का वह है फैक्ट्री के बेकार पदार्थों एवं रसायनों को नदी, तालाब आदि में बहाना | मित्रों ज्यादातर फैक्ट्री का जो कचरा होता है उसे जल स्रोतों में डाल दिया जाता है और फिर यह कचरा जल को प्रदूषित कर देता है |

3. औद्योगीकरण 

औद्योगीकरण भी Jal Pradushan का बहुत बड़ा कारण है क्योंकि जैसे जैसे औद्योगीकरण बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे उनसे निकलने वाले कचरे को जल स्रोत में डाल दिया जाता है और फिर जल प्रदूषण होता है |

4. जनसँख्या में वृद्धि 

जनसँख्या वृद्धि भी जल प्रदूषण का एक कारण है क्योंकि जैसे जैसे जनसँख्या बढ़ रही है वैसे वैसे घरों में रासयनिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है और उससे निकलने वाला पानी जल स्रोत में जाकर जल को प्रदूषित कर देता है |

5. जल का हद से ज्यादा इस्तेमाल 

आज कल लोग जल का हद से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं जब काम थोड़े में चल सकता है फिर भी लोग जल अधिक बर्बाद करते हैं | आपने अक्सर तालाब या नदी किनारे देखा होगा कि लोग वहां पर जानवरों को नहलाते हैं और कपड़े आदि भी वहां पर धोते हैं | फिर उससे निकलने वाला जो गन्दा पानी होते है वो फिर उसी नदी या तालाब में बहा देते हैं | इससे भी जल प्रदूषण बढ़ता है | हम लोग थोड़े पानी में भी जानवर आदि को नेहला सकते हैं और कपड़े धुल सकते हैं फिर इस तरह जल बर्बाद करना और जल को प्रदूषित करना कहाँ तक ठीक है | आप लोग कमेंट करके बताइये |

6. petroleum आदि पदार्थों का रिसाव होना 

पेट्रोलियम आदि पदर्थों का रिसाव भी एक कारण है जल प्रदूषण का क्योंकि पेट्रोलियम जैसे पदार्थों का जब रिसाव होता है तो वह रिस रिस कर जमीन के अंदर के पानी को प्रदूषित कर देते हैं |

7. कृषि बहिस्राव 

खेती में उर्वरकों, कीटनाशकों तथा pesticide आदि का इस्तेमाल भी जल प्रदूषण को बढ़ाता है क्योंकि जब हम लोग खेतों में कीटनाशकों तथा उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं तो फिर खेत में जो पानी लगाया जाता है उनमे ये उर्वरक मिल जाते हैं और ये पानी रिस रिस कर नीचे चला जाता है और जमीन के पानी को प्रदूषित कर देता है |

8. सामाजिक और धार्मिक रीती रिवाज 

हमारे भारत में सामाजिक और धार्मिक रीती रिवाज भी जल प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण है क्योंकि लोग रीती रिवाज के नाम पर गंगा जैसी पवित्र नदियों में काफी चीजें डाल देते हैं जो कि गंगा नदी के जल को प्रदूषित कर देती हैं | 

9. घर पर हानिकारक रसायन का प्रयोग 

हम लोग घर पर काफी तरह के रसायन का प्रयोग करते हैं जो कि हमारे जल को प्रदूषित करने के लिए जिम्मेदार होता हैं | 

जल प्रदूषण का प्रभाव | Effect of Water pollution in Hindi

मित्रों अब हम आपको Jal Pradushan से क्या प्रभाव अर्थात क्या असर पड़ता है ये बताएंगे |

1. मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव 

Jal Pradushan का असर मानव स्वास्थ्य पर काफी ज्यादा पड़ता है | प्रदूषित जल पीने से कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं | प्रदूषित जल का इस्तेमाल अगर हम लोग नहाने के लिए करें तो फिर हमारे शरीर पर इससे काफी ज्यादा दिक्कत हो सकती हैं | जल प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए भीत हानिकारक है और इससे काफी बीमारियां हो सकती हैं |

2. जलीय जीव को हानि 

Jal Pradushan की वजह से जल में रहने वाले जीवों पर भी काफी असर पड़ता है | समुद्र में तो कई प्रजातियां जल प्रदूषण की वजह से विलुप्त होने की कगार पर हैं |

3. फसलों को क्षति

Jal Pradushan का असर हमारे खेतों में होने वाली फसलों पर भी पड़ता है |

4. एसिडिक बारिश 

कभी कभी तो Jal Pradushan एसिडिक बारिश का भी कारण बन जाता है जो कि बहुत ज्यादा खतरनाक है |

5. कृषि भूमि पर असर 

Jal Pradushan की वजह से हमारे उपजाऊ कृषि भूमि भी बेकार हो जाती है | 


जल प्रदूषण का समाधान | Solution of Water pollution in Hindi


मित्रों Jal Pradushan की समस्या को पूरी तरह से ख़त्म करने के लिए हमें कड़े से कड़े कदम उठाने होंगे | 

1. जल प्रदूषण को ख़त्म करने के लिए हमें हमें अपने घरों में रासायनिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल बंद करना होगा |

2. खेती में कीटनाशकों आदि का प्रयोग बंद करना होगा |

3. हम लोगों को प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम करना होगा क्यूंकि यह प्लास्टिक समुद्र आदि में काफी ज्यादा जल प्रदूषित कर देती है और प्लास्टिक रीसायकल पर ध्यान देना होगा |. 

4. हम सबको समय समय पर नदी नालों आदि की सफाई करते रहना होगा |

5. फैक्ट्री आदि से निकलने वाले ख़राब पदार्थ को नदी नाला या तालाब में नहीं बहाना है बल्कि उस ख़राब को भी रीसायकल करने पर ध्यान देना होगा |

६. किसी भी तरह का कचरा नदी, नाला, तालाब , या समुद्र में नहीं फेकना चाहिए |

७. सामाजिक और धार्मिक रीती रिवाज के नाम पर जो चीजें हम गंगा आदि नदियों में बहाते हैं उसे भी बंद करना होगा |

निष्कर्ष ( Water Pollution in Hindi )

मित्रों आशा करता हूँ कि आपको हमारे ये आर्टिकल Water Pollution in Hindi पसंद आया है और  जल प्रदूषण के बारे में काफी जानकारी हो गयी होगी | यदि आपके मन में हमारे इस आर्टिकल Jal pradushan kya hai के  बारे में कोई सुझाव या कोई प्रश्न है तो फिर आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं |

धन्यवाद 

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गुरुवार, 18 मार्च 2021

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फास्टैग क्या है ? | What is Fastag and How it works ?

 फास्टैग क्या है | What is Fastag ( Electronic Toll Collection ) and How it works ?

दोस्तों अगर आपको रोड ट्रिप करना पसंद है तो हो सकता है कि आपने फास्टैग के बारे में सुना हो और आपको इसके बारे में पता हो | अगर आपको फास्टैग के बारे में पता है तो अच्छी बात है अगर आपको फास्टैग के बारे में नहीं पता है तो फिर आज के इस आर्टिकल ( What is Fastag ? ) में हम आपको फास्टैग के बारे में सब कुछ बताएंगे |

What is Fastag and How it works
Whats is Fastag and How it works ?



फास्टैग क्या है | What is Fastag in Hindi (Electronic Toll Collection ) ?

दोस्तों अगर आप अपनी गाड़ी से हाईवे से कहीं जाते हैं तो फिर आपको  टोल टैक्स देना होता है | यह टोल टैक्स देने में काफी समय लग जाता है कभी कभी तो काफी लम्बी लाइन लगी होती है और टोल टैक्स के चक्कर में हमारा काफी समय बर्बाद हो जाता है | अब आज के समय में टोल टैक्स पेमेंट का काम फास्टैग के द्वारा आसानी से हो जाता है |

फास्टैग एक तरह का टैग या बारकोड होता है जो आपको अपनी कार की 
 विंडस्क्रीन पर लगाना होता है फिर जैसे ही आप टोल प्लाजा से गुजरते हैं तो फिर आपको इस फास्टैग से अपने आप टोल टैक्स कट जाता है | 

अगर दूसरे शब्दों में कहें तो ये भी कह सकते हैं कि फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से टोल कलेक्शन का जरिया है |

इससे समय कि काफी बचत हो जाती है और हमें लम्बी लम्बी लाइन में भी नहीं लगना पड़ता है |

फास्टैग कैसे काम करता है ? | How Fastag  ( Electronic toll collection ) works ?


दोस्तों अब मैं आपको ये बताऊंगा कि फास्टैग कैसे काम करता है ?

दोस्तों , आपको फास्टैग अपनी कार की विंडस्क्रीन पर लगाना होता है इस फास्टैग में RFID chip ( रेडिओ फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन ) लगी होती है | फिर जैसे ही आप टोल प्लाजा पर पहुंचेंगे और फिर आपको वहां पर फास्टैग वाली लाइन अलग से ही दिख जाएगी और जैसे ही आप टोल प्लाजा के गेट के पास पहुंचेंगे वैसे ही वहां पर लगा सेंसर आपके फास्टैग को रीड करके आपके अकाउंट से टोल टैक्स काट लेगा | 

अगर आपने अपने फास्टैग में बैंक अकाउंट जोड़ रखा है तो आपके बैंक अकाउंट से पैसे काटेंगे अगर आपने इसमें रिचार्ज करवा रखा है तो आपके फास्टैग अकाउंट से पैसे कट जायेंगे |
जैसे ही आपके अकाउंट से पैसे कटेंगे फिर आपके पास एक मैसेज आ जायेगा |

फास्टैग कैसे बनवाएं | How to make Fastag in Hindi ?

दोस्तों अगर आप फास्टैग लेना चाहते हैं तो फिर इसे आप Offline और Online दोनों तरीके से ले सकते हैं | ऑफलाइन में आप बैंक में जाकर फास्टैग बनवा सकते हैं और ऑनलाइन में आप  Paytm से अप्लाई कर सकते हैं | जब आपका फास्टैग अकाउंट बन जायेगा फिर आप उसमे रिचार्ज कर सकते हैं |  
फास्टैग 7 कलर के होते हैं |
और इसे दो केटेगरी में बांटा गया है | 

पहला होता है M टाइप ,इसमें केवल एक ही तरह के वाहन को रखते हैं |

M टाइप के अंतर्गत केवल प्राइवेट वाहन आते हैं | इसका फास्टैग कार्ड violet कलर का होगा |

दूसरी केटेगरी है N टाइप , इसके अंतर्गत कमर्शियल वाहन आते हैं | अगर आप अपनी गाड़ी से सामान ढोते हैं तो फिर आपको ऑरेंज कलर का फास्टैग मिलेगा | 

अगर आपका 2 axle का वाहन है तो फिर आपको ग्रीन कलर का फास्टैग मिलेगा |

अगर आपका वाहन 3 axle  का  है तो फिर आपको पीले कलर का फास्टैग कार्ड मिलेगा |

अगर आपका वाहन 4, 5, 6, axle का है तो फिर आपको पिंक कलर का फास्टैग कार्ड मिलेगा |

अगर आपका वाहन 7 axle का है तो फिर आपको स्काई ब्लू कलर का फास्टैग मिलेगा |

अगर आपका वाहन कोई मशीनरी है तो फिर आपको ब्लैक कलर का फास्टैग मिलेगा | 

मेरे कहने का मतलब है कि जैसा आपका वाहन होगा वैसे ही कलर का आपको फास्टैग मिलेगा |


फास्टैग के फायदे | Benefits of Fastag or ETC

फास्टैग के काफी फायदे होते हैं जैसे कि - 

फास्टैग का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसकी वजह से टोल प्लाजा पर कार रोकने की जरुरत नहीं है और इससे हमारा काफी समय बचता है |

टोल प्लाजा पर सबसे ज्यादा दिक्कत खुले पैसे को लेकर होती थी अब ये दिक्कत भी नहीं होगी |

इसमें Cash back की भी सुविधा होती है |

इससे लूटपाट नहीं होगी क्योंकि कई बार देखा गया है कि लोग टोल प्लाजा लूट ले जाते हैं अब वो भी नहीं होगा |



दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको हमारा ये What is Fastag ?आर्टिकल पसंद आया होगा |
अगर आपके मन में हमारे इस आर्टिकल " What is Fastag and How it works ? " के बारे में कोई सवाल या सुझाव है तो फिर आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं |
 
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रविवार, 7 मार्च 2021

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भगवान् कृष्ण ने अपनी बांसुरी क्यों तोड़ी थी ? | Bhagwan Krishan ne apni bansuri kyun todi thi ?

 भगवान् कृष्ण ने अपनी बांसुरी क्यों तोड़ी थी तथा राधा की मृत्यु कैसे हुई ?

नमस्कार मित्रों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भगवान Shri Krishna ने अपने प्राणों से भी ज्यादा प्रिय अपनी बांसुरी को क्यों तोड़ दिया था ?

आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसकी वजह से भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी तोड़ दी थी ?

 मित्रों, 
क्या आप जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण को यह बांसुरी अत्यंत पसंद क्यों थी ?

क्या आप जानते हैं कि राधा जी की मृत्यु कब और कैसे हुई थी ?

क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण ने अपनी पसंदीदा बांसुरी को क्यों तोड़ दिया था  ?

क्या आप जानते हैं कि श्री कृष्ण की इस बांसुरी को उन्हें किसने दिया था ?

इन सब सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल में मिलेंगे |



krishan ne apni bansuri kyun todi , radhi ki mrityu kaise hui
Krishan ne apni bansuri kyun todi ?



भगवान श्री कृष्ण को यह बांसुरी अत्यंत पसंद क्यों थी ?


 मित्रों भगवान श्री कृष्ण की बांसुरी कोई साधारण बांसुरी नहीं थी वह चमत्कारी और शक्तिशाली बांसुरी थी | कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण को सबसे ज्यादा प्रिय दो ही चीजें थी एक बांसुरी और दूसरी राधा | ये दोनों आपस में गहराई से एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं | जब भी संसार में प्रेम की मिसाल दी जाती है तो राधा कृष्ण का नाम सबसे पहले आता है |

भगवान श्री कृष्ण के जितने भी चित्र मिलते हैं उन सब में बांसुरी उनके साथ जरूर होती है | बांसुरी श्री कृष्ण के राधा के प्रति प्रेम का प्रतीक है | श्री कृष्ण  राधा जी से पहली बार अलग तब हुए थे जब कंस ने बलराम और श्रीकृष्ण को आमंत्रित किया था |

 मथुरा जाने से पहले श्री Krishan राधा से मिले और फिर उनसे दूर चले गए | भगवान कृष्ण ने राधा जी से कहा कि वह वापस आएंगे परंतु भगवान श्री कृष्ण राधा जी के पास वापस नहीं आए और फिर भगवान श्री कृष्ण की शादी रुक्मणी से हो गई |

कृष्ण के चले जाने के बाद राधा जी का वर्णन बहुत कम हो गया है | जब भगवान् कृष्ण जाने से पहले राधा से मिले थे तो राधा ने उनसे कहा था कि  भले ही वह उनसे दूर जा रहे हैं | लेकिन उनके मन में कृष्ण हमेशा उनके साथ ही रहेंगे | फिर कृष्ण - बलराम मथुरा गए और वहां पर कंस का वध करके उन्होंने प्रजा की रक्षा की | फिर उसके बाद प्रजा की रक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण द्वारका चले गए

भगवान् कृष्ण के जाने के बाद राधा जी की जिंदगी ने एक अलग ही मोड़ लिया | फिर राधा की शादी एक यादव से हो गई थी | राधा ने पत्नी के तौर पर अपने सारे कर्तव्य पूरे किए हैं और दूसरी तरफ भगवान श्री कृष्ण ने अपने सभी कर्तव्य निभाएं जिसके लिए भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर अवतरित हुए थे |

राधा जी की मृत्यु कैसे हुई थी ?


अपने सभी कर्त्तव्य को भली-भाँति निपटाने के बाद राधा जी कृष्ण से मिलने द्वारका गयीं | | द्वारका में जब भगवान कृष्ण ने राधा को देखा तो वह बहुत प्रसन्न हुए तथा दोनों लोग संकेतों की भाषा में मन ही मन में एक दूसरे से बातें करने लगे |

 राधा को  द्वारका में कोई नहीं पहचानता था राधा जी के अनुरोध पर कृष्ण ने उन्हें महल में एक सेविका के रूप में नियुक्त किया | राधा जी दिनभर महल में रहती थी और दिनभर महल से जुड़े कार्य देखती थी और मौका मिलते ही वह श्री कृष्ण के दर्शन कर लेती थी |

लेकिन राधा जी महल में कृष्ण से पहले जैसे आध्यात्मिक सम्बन्ध महसूस नहीं कर पा रही थी |

इसलिए राधा जी ने सोचा की वे महल से दूर जाकर दोबारा श्री कृष्ण के साथ गहरा आत्म संबंध स्थापित कर पाएंगी | फिर राधा केवल चली जा रहीं थी वो भी यह जाने बिना की वह कहाँ जा रही हैं ?    लेकिन भगवान श्री कृष्ण जानते थे | फिर काफी समय बीतने के बाद राधा बिल्कुल अकेली और कमजोर हो गई उस वक्त उन्हें भगवान श्री कृष्ण की आवश्यकता पड़ी |

अंत समय में भगवान श्रीकृष्ण राधा के सामने आये और राधा से कहा कि वह उनसे कुछ मांगे | लेकिन राधा ने इंकार कर दिया कृष्ण के दोबारा आग्रह करने पर राधा ने कहा कि वह आखरी बार अपने प्रिय श्री कृष्ण को बांसुरी बजाते हुए सुनना चाहते हैं | फिर भगवान श्री कृष्ण ने बांसुरी ली और बेहद  सुरीली धुन बजाने लगे जब श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी से आलोकित धुन बजाना शुरू किया तो राधा रानी जी को शांति मिली और पुराने दिनों के आनंद की अनुभूति हुई | फिर वहां पर राधा जी ने बांसुरी की धुन सुनते हुए ही अपने प्राण त्याग दिए अर्थात उनकी मृत्यु हो गयी |

भगवान कृष्ण ने अपनी पसंदीदा बांसुरी को क्यों तोड़ दिया था  ?


माना कि भगवान कृष्ण जानते थे कि उनका प्रेम अमर है | फिर भी वे राधा की मृत्यु बर्दाश्त नहीं कर सके और भगवान श्री कृष्ण ने अपनी प्रिये बांसुरी  तोड़कर झाड़ी में फेंक दी | इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने जीवन भर बांसुरी या और कोई वादक यन्त्र नहीं बजाया |

 और इस प्रकार परमात्मा और मनुष्य के अमर प्रेम के प्रतीक चिन्ह बांसुरी को श्री कृष्ण ने भारी मन और नम आंखों से तोड़ दिया |

श्री कृष्ण की इस बांसुरी को उन्हें किसने दिया था ?

आइए अब हम आपको बताते हैं कि श्रीकृष्ण को बांसुरी किसने दी थी | जब भगवान् कृष्ण का जन्म हुआ था उसके बाद सभी देवी देवता उनसे मिलने धरती पर आने लगे तभी भगवान् शिव ने सोचा कि उन्हें भी अपने प्रिये भगवान् के बाल स्वरुप के दर्शन करने चाहिए |

 लेकिन वे कुछ सोचकर रुके कि अगर वो उनसे मिलेंगे तो उन्हें उपहार में क्या देंगे तभी महादेव शिव को कुछ याद आया कि उनके पास ऋषि दधीचि की हड्डी पड़ी है | 

ऋषि दधीचि वही महरिशी हैं जिन्होंने अपने धर्म के लिए अपने शरीर को त्याग दिया था और अपने शक्तिशाली शरीर की सभी हड्डियां दान कर दी थी | हड्डियों की सहायता से विश्वकर्मा ने 3 धनुष और इंद्र के लिए बज्र का निर्माण किया था | महादेव शिव जी ने उस हड्डी को घिस कर एक बांसुरी बनाई | 

जब भगवान श्री कृष्ण से मिलने शंकर जी गोकुल पहुंचे फिर शंकर भगवान ने भेंट स्वरूप कृष्ण भगवान को वह बांसुरी दे और उन्हें आशीर्वाद दिया | 
तभी से भगवान श्री कृष्ण वह बांसुरी को अपने पास रखते हैं |

मित्रों अगर आपको यह पौराणिक कथा पसंद आई है तो इसे अपने मित्रों में जरूर शेयर करें और यदि आपके मन में इस आर्टिकल से जुड़ा हुआ कोई प्रश्न या कोई सुझाव है तो आप हमें कमेंट करके बता दीजिए या फिर हमें मेल कर दीजिए |











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