Saturday, October 10, 2020

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Dussehra kyun manaya jata hai in hindi 2020 | दशहरा क्यों मनाया जाता है ?

 Dussehra | दशहरा

नमस्कार मित्रों, आज के इस आर्टिकल में मैं आपको Dussehra के बारे में बताऊंगा। भारत में दशहरा बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। दशहरा आश्विन मॉस के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को मनाया जाता है।  यह नवरात्री के बाद आता है। इस दिन को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। दशहरा वाले दिन लोग शस्त्र पूजा भी करते हैं।  मित्रों आज के इस आर्टिकल में मैं आपको बताऊंगा कि -

-- दशहरा का महत्व 
-- दशहरा क्यों मनाया जाता है ?
-- भारत में दशहरा मेला 
-- आज के समय में दशहरा का बदलता रूप |

आज के इस आर्टिकल में आपको इन सभी बातों के बारे में पता चलेगा। 

Happy Dussehra 2020



दशहरा का महत्व (Dussehra significance)

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार दशहरा का अपना महत्व है।  दशहरा को बुराई पर अच्छाई की जीत की ख़ुशी में मनाया जाता है। भारत में दशहरा को जीत के जश्न के रूप में मनाया जाता है।  इस जश्न को मनाने  के लिए सभी लोगों की मान्यता और धारणा अलग अलग प्रकार की है। काफी लोग इस दिन शस्त्र पूजा करते हैं क्यूंकि वो इसे युद्ध में मिली जीत का प्रतीक मानते हैं।

 किसान लोगों के लिए ये वह समय है जब वो अपने खेत की फसल उगा कर अनाज के रूप में अपनी संपत्ति को घर ले जाते हैं और फिर वे जश्न मना कर भगवान का धन्यवाद करते हैं। सबकी मान्यताएं अलग अलग हैं पर एक बात सबकी एक जैसी है कि दशहरा के त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जीत की ख़ुशी में मनाते हैं। 

2020 में दशहरा कब है | Dussehra date in 2020 ?

मित्रों इस साल दशहरा २५ अक्टूबर २०२० (25 october 2020) दिन रविवार को है।   इसको हर साल आश्विन माह की  शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाते हैं। 

दशहरा क्यों मनाया जाता है? | Dussehra kyun manaya jata hai 

मित्रों, दशहरा पर्व को मनाने के पीछे काफी कहानियां प्रचलित हैं जिसमे सबसे ज्यादा प्रमुख है राम और रावण की कहानी और दूसरी जो कहानी है जिसमे दुर्गा माता ने महिषासुर का वध किया था। इसके अलावा पांडवों का वनवास तथा देवी सती की कहानी भी है।  इस सभी में जो सबसे ज्यादा प्रमुख है वो है राम रावण की कहानी जो इस प्रकार है -

राम, राजा दशरथ के पुत्र थे और अयोध्या के राजकुमार थे।  इनकी पत्नी का नाम सीता था और भाई का नाम लक्ष्मण इसके अलावा इनके दो और भाई थे।  राजा दशरथ की पत्नी कैकेयी के कारण राम को चौदह वर्ष के लिए अपनी पत्नी और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या छोड़ कर वनवास के लिए जाना पड़ा।  इसी वनवास के दौरान रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था। 

रावण जो कि बहुत ही ज्ञानी था और बहुत बलशाली भी था। उसमे इस बात का काफी अहंकार आ गया था और वह भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानता था।  उसके अहंकार और अत्याचार को ख़त्म करने के लिए विष्णु भगवान् ने राम का अवतार लिया था।  

जैसा कि आप सब जानते हैं कि रावण ने सीता माता का अपहरण कर लिया था फिर सीता जी को वापस लाने के लिए राम और रावण में घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में हनुमान, सुग्रीव, विभीषण और बानर सेना ने राम का साथ दिया और अंत में भगवान् राम ने रावण का वध कर दिया। इस प्रकार बुराई पर अच्छाई की जीत हुई और रावण का सर्वनाश हो गया। तब से हर साल इस विजय को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। जिसे हम लोग दशहरा भी कहते हैं। 

भारत में दशहरा मेला | Dussehra Mela

दोस्तों भारत में दशहरा बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है।  इन कथाओं को माध्यम बना कर पूरे भारत में अलग अलग जगहों पर लोग दशहरा का मेला मनाते हैं। जिसमे कि रामलीला का आयोजन किया जाता है और राम रावण युद्ध को नाटक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। 

दशहरा वाले दिन सभी बच्चे बड़े अपने परिवार के साथ दशहरा का मेला देखने रामलीला मैदान में जाते हैं। वहां पर तरह तरह की खिलौने की दुकाने, खाने पीने की दुकाने होती हैं।  जहाँ पर लोग अपने परिवार के साथ खाते पीते हैं तथा दशहरा के मेला का आनंद लेते हैं। वहां पर रावण मेघनाद, कुम्भकरण के पुतले बनाये जाते हैं और राम रावण युद्ध नाटक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अंत में इन पुतलों का दहन किया जाता है। इस तरह दशहरा का मेला हम लोग बहुत ही जश्न और धूमधाम से मनाते हैं। 

यह त्यौहार हमें बुराई पर अच्छाई की विजय हमेशा होती है यह सीख देता है |

आज के समय में दशहरा का बदलता रूप | Dussehra ka badalta roop 

दोस्तों , दशहरा हम लोग इसलिए मनाते हैं जिससे कि सबको बुराई पर अच्छाई की जीत का सन्देश मिले और हम भी अपने अंदर की बुराई ख़त्म करें और अच्छाई को अपनाएँ।  लेकिन आज के समय में काफी लोग ऐसे हैं जो कि अपने बच्चों को दशहरा का मतलब अच्छे से नहीं समझाते। काफी लोग ऐसे भी होते हैं जो कि रामलीला में गए खाया पिया और मेला देख कर चले आये लेकिन उस मेले से उस राम रावण कि कहानी से कुछ सीखते नहीं हैं।  

दशहरा एक सादगी से मनाया जाने वाला त्यौहार है पर आज के समय में लोग इनमे काफी ज्यादा आतिशबाजी जलाते हैं और पटाखे फोड़ते हैं जिससे कि प्रदुषण बढ़ता है पहले के समय में ये होता था कि त्यौहार पर लोग एक दूसरे से मिलते थे पर आज के समय में लोग mobile से ही हैप्पी दशहरा बोल देते हैं। इस तरह धीरे धीरे दशहरा में बदलाव आता जा रहा है। 

 आज के समय में जरुरत है हर त्यौहार को और उसका मतलब बच्चों को बताया जाए और उससे क्या सीख मिलती है ये भी बताया जाये। 

Happy Dussehra 2020 to you and your family

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Thursday, October 8, 2020

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Navratri कथा, नवरात्रि क्यों मनाते हैं ? पूजा सामग्री और पूजा विधि |

 Navratri कथा, नवरात्रि क्यों मनाते हैं ? पूजा सामग्री  और पूजा विधि  

हेलो दोस्तों , हमारा देश भारत त्योहारों का देश है यहाँ पर समय समय पर काफी त्यौहार मनाये जाते हैं।  इन्हीं सभी त्योहारों में से एक त्यौहार है - Navratri | नवरात्रि भारत में मनाया जाने वाला हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है जो कि यहाँ भारत में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। 

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि -

- नवरात्रि (Navratri) का क्या मतलब होता है ?
- नवरात्रि क्यों मनाते हैं | Navratri kyun manate hain ?
- नवरात्रि  व्रत कथा (नवरात्र व्रत की शुरुआत कहाँ से हुई - सुमति की कहानी )
- नवरात्रि साल में दो बार क्यों आती है ?
- नवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्री कौन कौन सी है ?
- नवरात्रि पूजा की विधि क्या है ?

अगर दोस्तों आपको इन प्रश्नो के जवाब नहीं पता हैं तो आज के इस आर्टिकल में हम Navratri पर्व के बारे में आपको सारी जानकारी देंगे। 

Navratri का क्या मतलब होता है ?

नवरात्रि एक संस्कृत का शब्द है और इसका मतलब होता है नौ रातें  | नवरात्रि के इस पर्व में नौ रातों तक देवी के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। 
नवरात्रि साल में दो बार आते हैं, एक चैत्र मास शुक्ल पक्ष को जिसे हम लोग चैत्र नवरात्रि कहते हैं जिसमे एक से नौ तारीख तक नवरात्रि व्रत रखे जाते हैं और दूसरा आश्विन मास शुक्ल पक्ष को जो शारदीय नवरात्रि कहलाते हैं जिसमे पहेली तारीख से नौ तारीख तक व्रत रखे जाते हैं। 
दोस्तों, Navratri के इस त्यौहार में हम देवी के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं।  देवी के वो नौ स्वरुप, इस प्रकार हैं -
  • शैलपुत्री
  • ब्रह्मचारिणी
  • चंद्रघंटा
  • कूष्माण्डा
  • स्कंदमाता
  • कात्यायनी
  • कालरात्रि
  • महागौरी
  • सिद्धिदात्री

दोस्तों, Navratri पर्व में हम इन नौ देवियों की पूजा-आराधना करते हैं। 


Happy Navratri



नवरात्रि क्यों मनाते हैं | Navratri kyun manate hain ?

 नवरात्रि क्यों मनाते हैं ? दोस्तों इस बारे में आपके मन में भी काफी बार ख्याल आया होगा आखिर हम नवरात्रि पर्व मनाते क्यों हैं ?  दोस्तों, नवरात्रि पर्व मनाने के पीछे काफी कथाएं प्रचलित हैं जिनमे प्रमुख दो कथाएं हैं और इन दो प्रमुख कथाओं के अलावा सुमति की कथा भी है। अब मैं आपको एक एक करके सभी कथाओं के बारे में बताऊंगा। 

नवरात्रि (Navratri) से जुड़ी प्रथम प्रमुख कथा 

 दोस्तों, यह बात उस समय की है जब भगवन श्रीराम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था | तब ब्रह्मा जी ने भगवान श्रीराम से रावण वध के लिए चंडी देवी की उपासना कर उन्हें प्रसन्न करने को कहा।  जैसा ब्रह्मा जी ने कहा था तब भगवान श्रीराम ने उसी के अनुसार चंडी देवी को प्रसन्न करने के लिए एक हवन आयोजित किया उस हवन के लिए 108 दुर्लभ नीलकमल की व्यवस्था की गई थी जिससे कि हवन सही तरीके से पूर्ण हो जाए और चंडी देवी प्रसन्न हो जाएँ। 

वहीँ दूसरी तरफ रावण ने भी अमर होने के लिए चंडी पाठ चालू कर दिया और इस बात की खबर इन्द्र देव ने हनुमान द्वारा श्रीराम तक पहुचायी और भगवान् श्रीराम को सलाह दी कि हवन को सही समय पर पूर्ण करना चाहिए। 

वहीँ दूसरी तरफ रावण ने भगवान् श्रीराम के 108 दुर्लभ नीलकमल में से 1 नीलकमल अपनी शक्तियों द्वारा गायब कर दिया जिससे कि भगवान् श्रीराम का हवन पूर्ण न हो पाए। जब 1 नीलकमल कम हो गया तो भगवान श्रीराम का चंडी देवी को प्रसन्न करने का संकल्प टूटता नजर आ रहा था और इस बात का भी भय लग रहा था कि कहीं चंडी देवी नाराज न हो जाएँ और तुरंत दुर्लभ नीलकमल कि व्यवस्था कर पाना संभव  नहीं था।  

तभी प्रभु श्रीराम को याद आया कि लोग उन्हें कमलनयन नवकंच लोचन भी कहते हैं तो फिर उन्होंने चंडी देवी को प्रसन्न करने के संकल्प और हवन को पूर्ण करने के लिए अपना एक नेत्र अर्पित करने का मन बना लिया और फिर जैसे ही प्रभु श्रीराम ने अपनी आँख निकालने के लिए तीर निकला और अपनी आँख निकालने जा रहे थे तभी चंडी देवी प्रकट हो गयी और भगवान् राम का हाथ पकड़कर रोका और भगवान श्रीराम से कहा कि मैं प्रसन्न हूँ और उन्होंने फिर भगवान् श्रीराम को विजय होने का आशीर्वाद दिया। 

दूसरी तरफ रावण का भी चंडी पाठ कुछ ब्राह्मण कर रहे थे तो फिर हनुमान जी वहां पर एक ब्राह्मण बालक का रूप बदल कर पहुंच गए और वहां पर सेवा में जुट गए फिर वहां पर जब ब्राह्मणों ने हनुमानजी की निस्वार्थ सेवा देख कर उन्हें वरदान मांगने को कहा - फिर हनुमान जी ने उनसे आग्रह किया कि आप जो मंत्र बोल कर यज्ञ कर रहे हैं।  उस मंत्र में " ह " की जगह पर " क " उच्चारण करें  बस यही मेरी कामना है ऐसा हनुमान जी ने कहा। 

फिर ब्राह्मण हनुमान जी के रहस्य को समझ न सके और तथास्तु बोल कर इच्छापूर्ति का आशीर्वाद दे दिया।  मंत्र में एक शब्द था "भार्तिहरिणी" जिसका मतलब होता है भक्तों की पीरा हरने वाली पर ब्राह्मणों ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया था जिसके फलस्वरूप हरिणी की जगह " करिणी " जिसका मतलब होता है भक्तों को पीड़ित करने वाली  यह सब देख कर चंडी देवी रावण से काफी ज्यादा नाराज हो गयी और रावण को सर्वनाश का श्राप दे दिया।  हनुमान जी की वजह से रावण के यज्ञ की दिशा ही बदल गयी। 
 भगवान श्रीराम की चंडी देवी को प्रसन्न करने की पूजा आराधना नौ दिन चली थी।  दोस्तों नवरात्रि की प्रमुख कथा यही है। 

Navratri से जुड़ी दूसरी प्रमुख कथा 

दोस्तों , Navratri से जुड़ी जो दूसरी प्रमुख कथा है वो इस प्रकार है।  बहुत समय पहले की बात है, एक महिषासुर नाम का राक्षस था उसका आधा  शरीर राक्षस का और आधा शरीर भैंसे का था। उसने कई वर्षों तक ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की।  उसकी तपस्या से ब्रह्मा जी बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने महिषासुर से कहा कि मांगो जो भी वरदान तुम्हे माँगना हो।  फिर महिषासुर ने ब्रह्मा जी से कहा कि हे प्रभु मुझे ऐसा वरदान दें कि इन तीनो लोकों में किसी भी देवता या मानव द्वारा मेरी मृत्यु न हो सके  तब ब्रह्मा जी ने कहा - तथास्तु ऐसा ही होगा। 

 ब्रह्मा जी से वरदान पाने के बाद महिषासुर बहुत ही ज्यादा अत्याचारी और घमंडी हो गया और फिर उसने देवताओं पर आक्रमण किया और देवताओं को हरा कर उनके क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया। सभी देवता महिषासुर के अत्याचार से परेशान हो चुके थे फिर सभी देवता मिलकर ब्रह्मा जी, विष्णु जी और शंकर जी की शरण में गए। 

फिर सभी देवताओं ने मिलकर इस समस्या से निपटने का उपाय ढूंढ़ने का प्रयास किया। फिर ब्रह्मा जी , विष्णु जी , और शंकर भगवान ने मिलकर एक तेज प्रकाश पुंज से एक देवी का निर्माण किया। इसी देवी को सारी दुनिया आदिशक्ति माँ दुर्गा के नाम से जानती है। फिर सभी देवताओं ने माँ दुर्गा को सभी प्रकार के अस्त्र शास्त्र से सुसज्जित किया। शंख , चक्र , गदा , त्रिशूल , धनुष बाण  इत्यादि शस्त्रों को धारण कर माँ महिषासुर की नगरी की तरफ चल पड़ी। 

जब महिषासुर को उनके बारे में सूचना मिली तो वो उनसे मिलने के लिए लालायित हो उठा।  फिर महिषासुर ने देवी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। फिर माँ दुर्गा ने महिषासुर से कहा कि हे असुरराज तुम मुझसे युद्ध करो अगर तुमने मुझे युद्ध में जीत लिया तो मैं तुमसे विवाह कर लूंगी। फिर महिषासुर माँ दुर्गा से युद्ध के लिए तैयार हो गया।  फिर माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध प्रारम्भ हो गया। 

महिषासुर काम, क्रोध, लोभ, मोह के आधीन हो गया था उसका विवेक नष्ट हो चुका था। फिर माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक घमाशान युद्ध चला।  युद्ध में अस्त्र शस्त्र का प्रहार जारी था।  माँ दुर्गा ने महिषासुर के हर अस्त्र शस्त्र के प्रहार को नाकाम कर दिया। फिर अंत में माँ दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया और देवताओं को भयमुक्त किया।  फिर देवताओं ने माँ दुर्गा पर पुष्पवर्षा की। तब से हिन्दुओं में नवरात्रि मानाने का त्यौहार चालू हुआ। 

Navratri vrat katha ( नवरात्रि व्रत की शुरुआत कहाँ से हुई ? - सुमति की कहानी)


दोस्तों अब मैं आपको यहाँ पर नवरात्रि  व्रत कथा के बारे में बताने जा रहा हूँ कि नवरात्री व्रत कब और कहाँ से प्रारम्भ हुए थे। बहुत समय पहले की बात है एक बार बृहस्पति जी ने ब्रह्मा जी से पूछा कि हम नवरात्रि व्रत क्यों मानते हैं। तब ब्रह्मा जी ने बृहस्पति जी से कहा कि मैं आपको उस इंसान की कहानी सुनाता हूँ जिससे ये  Navratri vrat की शुरुआत हुई थी। एक ब्राह्मण था उसकी एक बेटी थी जिसका नाम सुमति था वो दोनों माँ दुर्गा के बहुत बड़े भक्त थे।

 ब्राह्मण और उसकी बेटी साथ में मिलकर हर रोज माँ दुर्गा की पूजा करते थे।  एक दिन सुमति अपने दोस्तों के साथ खेलने में मगन हो गयी और वो माँ दुर्गा की पूजा करना भूल गयी।  यह सब देखकर ब्राह्मण को बहुत तेज गुस्सा आया और उन्होंने अपनी बेटी सुमति से कहा आज तुमने माँ दुर्गा की पूजा नहीं की इसीलिए मैं तुम्हारी शादी एक कोढ़ी और गरीब इंसान से करवा दूंगा। यह सब सुनकर सुमति ने अपने पिता से कहा - पिता जी आप जिससे चाहो उससे मेरी शादी करवा दो मगर मुझे मिलेगा तो वो ही जो मेरे भाग्य में होगा। 

यह सब सुनकर सुमति के पिता को और तेज गुस्सा आया और फिर उन्होंने सच में सुमति की शादी एक कोढ़ी से करवा दी। फिर उस ब्राह्मण ने अपनी बेटी से कहा कि जा अपने कर्मों के फल भोग और तेरे भाग्य में जो लिखा है उसके भरोसे जी के दिखा। यह सब सुनकर सुमति बहुत उदास हुई और अपने पति के साथ चली गयी। सुमति की यह दशा देख माँ भगवती का दिल पिघल गया और माँ भगवती सुमति के सामने प्रकट हुई और सुमति से कहा बेटी - कोई भी वरदान मांग लो।  - सुमति को यह सब थोड़ा अजीब लगा और सुमति ने माँ भगवती से कहा कि माँ मैंने ऐसा क्या किया है कि आप मुझे वरदान देने के लिए तैयार हो। 

तब माँ भगवती ने कहा बेटी मैं आदिशक्ति हूँ मैं तुम्हे वरदान इसलिए देना चाहती हूँ क्यूंकि तुमने अपने पिछले जन्म में अच्छे कर्म किये हैं। 

फिर उन्होंने सुमति को उसके पिछले जन्म की कहानी सुनाई कि सुमति पिछले जन्म में एक चोर की पत्नी थी। वो चोर एक बार चोरी करते हुए पकड़ा गया तो राजा और उसके सैनिकों ने दोनों पति पत्नी को जेल में डाल दिया।  अब जेल में वहां पर, न खाने को कुछ था और न पीने को कुछ था।  अब हुआ ऐसा जब दोनों पति पत्नी जेल में थे तब नवरात्रि चल रहे थे और अनजाने में दोनों पति पत्नी ने navratri में न कुछ खाया और न कुछ पिया और फिर इस तरह अनजाने में नवरात्रि के सारे व्रत पूरे हो गए। इसीलिए सुमति को वरदान मिला माँ भगवती से, फिर सुमति ने सोचा मैं माँ भगवती से क्या वरदान मांगू तो फिर सुमति ने माँ भगवती से वरदान माँगा की वे उसके पति को ठीक कर दें।  फिर माँ भगवती ने उसका वरदान उसे दे दिया और उसके पति को ठीक कर दिया और फिर वहां से नवरात्रि व्रत की शुरुआत हुई। 

Navratri  साल में दो बार क्यों आती है ?

दोस्तों यह बात तो सभी लोग जानते हैं की नवरात्रि  साल में दो बार आती है। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है ?  दोस्तों नवरात्रि ( Navratri ) साल में दो बार आती है एक गर्मी की शुरुआत में और दूसरा सर्दी की शुरुआत में।  दोस्तों यही वो समय है जब मौसम हम पर बहुत ज्यादा असर  डालता है और इस समय फसल भी पकती है।  इस समय बीमारियां भी बढ़ जाती हैं आपने देखा होगा की इसी समय डॉक्टर्स के पास सबसे ज्यादा भीड़  होती है ।  

इसीलिए जो हमारे पूर्वज हैं उन्होंने धार्मिक अनुष्ठान के साथ 9  दिन व्रत का प्रावधान किया जिससे कि हमारे अंदर की सारी परेशानियां दूर हो जाएँगी क्यूंकि हम 9  दिन तक एक अच्छे तरीके से फलाहार करेंगे और हमारा शरीर फिर से सही हो जायेगा और इसके साथ साथ हम पूजा आराधना तथा धार्मिक अनुष्ठान करेंगे जिससे कि हमारा मन और हमारी आत्मा शुद्ध हो जाएगी। दोस्तों इसी वजह से यह समय देव शक्तियों की पूजा अर्चना करने का यह शुभ समय माना गया है।  इसलिए दोस्तों हम अपने मन और अपने शरीर का सही संतुलन बनाये रखने की लिए हम व्रत रख कर आदिशक्ति माँ दुर्गा की उपासना करते हैं। 

दोस्तों एक बार navratri को धर्म की अधर्म पर जीत के रूप में मनाते है और दूसरी बार इसे भगवान् राम के जन्म उत्सव के रूप में भी मनाते हैं जिसे राम नवमी कहते हैं। 
दोस्तों अगर आपके पास इसके अलावा कोई सुझाव या आपके अपने इस बारे में कोई विचार हो तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। 

 Navratri puja | नवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्री कौन कौन सी है ?

दोस्तों Navratri पूजा के लिए हमें कौन कौन सी सामग्री की आवश्यकता होती है  चलिए इस बारे में बात करते हैं। 
पूजा की थाली, गीली मिटटी, आम या पान के पत्ते, गुलाब या जासवंती के फूलों का हार, दो नारियल,  मिटटी का मटका, २ लाल नारंगी चुनरी, अगरबत्ती, जलपात्र, हल्दी, कुमकुम, अक्षत ( हल्दी और कुमकुम मिले चावल ), कपूर, सुपारी, मौली, ताम्बे का कलश, घी, जौ, रुई की बाती, अखंड घी का दिया, लाल कपड़ा, गंगा जल, चौकी, सिन्दूर, दक्षिणा, छुट्टे फूल, श्रृंगार का सामान, पूड़ी, इत्र, हलवा, खीर, पांच प्रकार के फल जो खट्टे न हों और मातारानी की तस्वीर चाहिए। 
दोस्तों नवरात्रि पूजा के लिए ये सभी सामग्री चाहिए।  

Navratri puja | नवरात्रि पूजा की विधि क्या है ?

नवरात्रि पूजा करने के लिए -
  • सबसे पहले स्नान करके पूजा के स्थान को गंगा जल से छींटे मारकर पवित्र कर लें। 
  • फिर पूजा स्थान पर चौकी रख कर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत से नौ कोने बनायें बीच से शुरू करते हुए बहार की तरफ। 
  • फिर भगवती देवी की प्रतिमा रख कर प्रतिमा के सामने जल का कलश रखें ।  देवी पुराण के अनुसार कलश को ही नौ देवियों के रूप मन जाता है। इसलिए नवरात्रि में कलश की पूजा की जाती है। 
  • फिर कलश पर मौली बाँध कर उसमे थोड़ा गंगा जल डालें, एक सुपारी, हल्दी, चावल और सिक्का डालें  और फिर आम या पान के पत्ते सजा कर कलश पर रखें। 
  • फिर एक नारियल लें और उस पर मौली बांधकर उस नारियल को उन आम के पत्तों पर सजा कर रख दें। 
  • अब एक घी का अखंड दीपक प्रतिमा के दायीं यानि right side पर रखें।  ( दिये को अभी जलाना नहीं है। ) और थाली, पूजा सामग्री पूजा के स्थान के पास ही रखें। 
  • सबसे पहले आसन ग्रहण करें और आचमन करें  फिर बाएं हाथ से जल लेकर दाएं  हाथ में डाल कर दोनों हाथों को शुद्ध करें। 
  • फिर  " ॐ दुर्गा देवयाय नमः " बोल कर तीन बार जल पियें | इसके बाद फिर से हाथ धो लें। 
  • फिर अपने आप को तिलक लगा कर अपने परिवार वालों को भी तिलक लगाएं और अखंड घी के दीपक को जला दें। 
  • याद रखें यह दीपक 9 दिन तक बुझना नहीं चाहिए और कलश अपनी जगह से हिलना नहीं चाहिए |
  •  हाथ में पुष्प और चावल रखें और संकल्प लें, संकल्प लेकर मां के सामने पुष्प और चावल छोड़ दें |
  • अब फूल से जल लें और जल का छिड़काव प्रतिमा और कलश पर करें उसके बाद हल्दी, कुमकुम से दुर्गा मां की प्रतिमा पर तिलक करें और कलश पर भी तिलक करें |
  • इसके बाद अक्षत को प्रतिमा के ऊपर छोड़ कर और फिर कलश पर भी अर्पित करें | आप एक चुनरी माता की प्रतिमा पर चढ़ाएं और कलश पर रखें नारियल पर भी चुनरी चढ़ाएं तथा कलश पर छुट्टे फूल अर्पित करें और माता रानी की प्रतिमा को हार पहनाएं  |
  • इसके बाद श्रृंगार का सामान माता के चरणों में रख दें और सुहागिन महिलाएं माता को श्रंगार चढ़ाकर अपने सुहाग की रक्षा के लिए प्रार्थना करें |
  • अब फूल द्वारा माता की प्रतिमा पर और कलश पर इत्र छोड़ें  और फिर अगरबत्ती माता को दिखा कर, घर में बने हुए प्रसाद को माता को दिखाकर चौकी के पास रख दें |
  • अब पांच प्रकार के फल माता रानी को चढ़ाएं तथा नारियल और दक्षिणा माता की प्रतिमा के पास रख दें और मिट्टी का छोटा मटका लेकर उसमें मिट्टी डालें और जौं को बो दें |
  • फिर मटके पर शुद्ध जल डालें और मटके पर मौली बांधकर माता की प्रतिमा के बाएं तरफ रख दें और मटके पर हल्दी कुमकुम का टीका लगा दे अब वही टीका अपनी मांग में लगाएं थोड़े से छुट्टे फूल मटके पर अर्पित करें |
  • अब दोनों हाथों में फूल और अक्षत लेकर दुर्गा माता से प्रार्थना करें कि हमसे इस पूजा विधि में जो कोई गलती हो गई हो तो हमें क्षमा करें |
  • फिर तीन बार ओम दुर्गा देवयाय नमः मंत्र का उच्चारण करें और माता के चरणों में फूल और अक्षत छोड़ दें |
  • अब दुर्गा मां की आरती करें कपूर और दीपक जलाकर आरती के बाद अपने परिवार को आरती दें और खुद भी आरती लें फिर आरती की थाली मां के पास रख दें तथा एक चम्मच पानी लेकर आरती के ऊपर से घुमाएं और नीचे छोड़ दें |
  • अब अपने परिवार को प्रसाद दें यदि आपने पहले और आखिरी दिन का व्रत संकल्प लिया है तो आप प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं और यदि आपने 9 दिन का व्रत संकल्प लिया है तो आप प्रसाद व्रत के समाप्ति के बाद ही ग्रहण करें |
  •  जिन महिलाओं ने 9 दिन का व्रत संकल्प लिया है वह माता के नौ रूप की पूजा दिन के हिसाब से करें व्रत रखने वाली महिलाएं प्रतिदिन फूलों का हार, चुनरी, फूल, अक्षत, प्रसाद, फल और अगरबत्ती माता को फिर से चढ़ाकर आरती करें और यदि हो सके तो दुर्गा चालीसा का पाठ करें |
                      Navratri पूरे होने पर कलश में रखें पानी के छींटे पूरे घर में मारें | ध्यान रहे माता को हर दिन अलग रंग की चुनरी चढ़ती है | 

जो इस प्रकार है  -

----  शैलपुत्री - लाल नारंगी
----  ब्रह्मचारिणी - पीला
----  चंद्रघंटा-सफेद 
----  कुष्मांडा-भूरा 
----  स्कंदमाता-गुलाबी
----  कात्यानी-हरा
----  कालरात्रि-आसमानी या ग्रे
----  महागौरी-नारंगी
----  सिद्धिदात्री-मेहरून या गहरा लाल |

                अपने परिवार के रीति रिवाज के हिसाब से कन्या पूजन अष्टमी या नवमी को किया जाता है | कन्या पूजन  navratri vrat का अहम हिस्सा माना गया है इस पूजन के लिए 10 साल तक की 9 लड़कियों की जरूरत होती है जिसमें महिलाएं मां जगदंबा के सभी नौ रूपों को याद करते हुए घर में आए सभी कन्याओं के पैर धोती हैं उनके हाथ में मौली बांधकर माथे पर बिंदी लगाती हैं | उनको हलवा पूड़ी और चने खाने के लिए देती हैं तथा कुछ तोहफे या  रुपए भी देती हैं | फिर जय माता दी कहकर लड़कियों के पैर छूकर उन लड़कियों के जाने के बाद खुद और अपने परिवार के साथ भोजन उसी जगह पर करती हैं जहां लड़कियों को भोजन कराते हैं |

 दोस्तों यह है  navratri की पूजा विधि

मित्रों अगर आपके मन में नवरात्रि से जुड़ा या इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सुझाव हो तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। 
अगर आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया है तो इस आर्टिकल को अपने सभी मित्रों के पास शेयर कर दीजिये। 

जय माता दी 

Happy Navratri 2020



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Sunday, September 20, 2020

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Coding क्या है और coding क्यों जरुरी है ?

Coding क्या है और  कोडिंग क्यों जरुरी है ? 

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल  में हम बात करेंगे Coding के बारे में कि कोडिंग क्या होती है और यह क्यों जरूरी है ?

 दोस्तों जैसा कि आप सब जानते हैं  कि Technology दिन प्रतिदिन advanced होती जा रही है और नई नई चीजें बन रही है और काफी लोग का यह मानना है कि आगे चलकर नौकरियां बहुत कम हो जाएंगी क्योंकि उनकी जगह पर रोबोट आ जाएंगे क्योंकि दोस्तों आजकल हर कंपनी में इंसान की जगह अब धीरे-धीरे रोबोट ले रहे हैं तो जो आगे आने वाला समय है वह कोडिंग का होगा क्योंकि जो भी ये रोबोट बनते हैं वो Coding की सहायता से ही बनते हैं |

Coding kya hai aur Coding kyun jaruri hai 


Coding से हम लोग नई नई एप्लीकेशन बना सकते हैं, सॉफ्टवेयर बना सकते हैं और टेक्नोलॉजी डेवलप कर सकते हैं और आगे यही समय आने वाला है | इसलिए दोस्तों आज के समय में कोडिंग सीखना बहुत जरूरी हो चुका है और अब सरकार ने भी यह कर दिया है कि क्लास 6 से कोडिंग स्टार्ट कर देंगे तो इस तरह दोस्तों अब सरकार भी इस ओर ध्यान दे रही है कोडिंग के तरफ, तो हम लोगों को भी अब यह समझ लेना चाहिए कि coding कितनी जरूरी है | हमें बच्चों को  स्टार्टिंग से ही कोडिंग सिखानी चाहिए जिससे कि आगे चलकर अपने पैरों पर खुद खड़े हो सके और कुछ नया कर सकें और अपना बेहतर भविष्य बना सकें |

दोस्तों अब हम लोग बात करेंगे कि Coding क्या है ? 

 दोस्तों coding कंप्यूटर की एक language है | जैसे हिंदी उर्दू मराठी गुजराती यह सब लैंग्वेज हैं वैसे ही कोडिंग कंप्यूटर की लैंग्वेज है पहले इसे  प्रोग्रामिंग भी कहते थे लेकिन फिर इसे coding बोलने लगे क्यूंकि इसकी काफी डिमांड थी और फिर इसका नाम प्रोग्रामिंग से एक स्टैंडर्ड नाम दिया गया कोडिंग |

दोस्तों अब मैं आपको एक उदाहरण देकर कोडिंग समझाता हूं | दोस्तों जैसे कोई एक रोबोट है या फिर आपने ड्राइवरलेस कार के बारे में भी सुना होगा यह बताइए कि जैसे कि जब हम कोई इंस्ट्रक्शन देंगे उस रोबोट को या फिर कार को तो हम अपनी लैंग्वेज में देते हैं तो फिर वह  हमारी लैंग्वेज कैसे समझता है | दोस्तों इसमें एक सिस्टम होता है वह क्या करता है कि हमारी language को coding में बदल देता है और रोबोट और driverless car उस कोडिंग को समझ लेते हैं और फिर वह उसी हिसाब से काम करते हैं तो आप समझ लीजिए दोस्तों इस हिसाब से कोडिंग कितनी जरूरी है ओके दोस्तों कोडिंग कंप्यूटर की लैंग्वेज होती है |

दोस्तों अब हम लोग बात करेंगे कि Coding जरूरी क्यों है ?
देखिए अब सरकार ने भी क्लास 6 से कोडिंग अनिवार्य कर दी है | अब सरकार भी कोडिंग की तरफ ध्यान दे रही है, देखिए दोस्तों अगर आप आईटी फील्ड में काम करना चाहते हैं या फिर आप कोई वेबसाइट बनाना चाहते हैं या सॉफ्टवेयर बनाना चाहते हैं तो इन सब के लिए कोडिंग सीखनी पड़ेगी आपको, क्योंकि बिना कोडिंग सीखें यह सब आप नहीं कर सकते इसलिए दोस्तों कोडिंग बहुत जरूरी है Coding के लिए आप ऑनलाइन कई ऐसी वेबसाइट है जो ऑनलाइन सिखाती है कोडिंग, आप चाहे तो घर बैठे कोडिंग सीख सकते हैं | मतलब अपने बच्चों को सिखा सकते हैं ओके दोस्तों इसी तरह कई ऐसी वेबसाइट है अब मैं आपको वेबसाइट के बारे में बता देता हूं जहां से आप घर बैठे कोडिंग सीख सकते हैं उनमें यह सबसे मेन वेबसाइट है वह है white hr जी हां यह वेबसाइट है काफी अच्छी वेबसाइट है यहां पर आप बच्चों को मतलब स्टार्टिंग से कोडिंग सिखा सकते हैं और आप यहां पर डेमो क्लास भी देख सकते हैं | whitehat jr काफी अच्छा है इसके अलावा भी और भी वेबसाइट है लेकिन whitehat jr सबसे बेस्ट है | 
ओके दोस्तों आज के इस आर्टिकल में इतना ही अब तो आप समझ चुके होंगे कि Coding क्या है और coding क्यों जरूरी है अगर आपके मन में कोई प्रश्न है इस आर्टिकल से जुड़ा हुआ तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं और हमें मेल कर सकते हैं |
ओके दोस्तों आज के लिए इस आर्टिकल में इतना ही 
धन्यवाद |

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Wednesday, August 26, 2020

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Self driving car explained in hindi

 Self driving car explained in hindi | सेल्फ ड्राइविंग कार

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम Self Driving Car के बारे में  बात करेंगे | आज मैं आपको self driving car से जुड़ी जानकारी दूंगा | दोस्तों एक समय था जब हम लोगों ने ऐसी कार की कल्पना भी नहीं की थी जो बिना ड्राइवर के चलेगी पर आज के समय में ऐसी कार बनाई जा रही है जो बिना ड्राइवर के चलेंगी | इन कारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, सॉफ्टवेयर, सेंसर्स, कैमरा आदि का इस्तेमाल होगा आज के आर्टिकल में हम लोग Self driving car के ही बारे में बताएंगे |

Self Driving Car


Self Driving Car क्या होता है ?

दोस्तों सबसे पहले बात करेंगे कि Self Driving car क्या होती हैं ? जैसे कि नाम से ही पता चल रहा है जो खुद से चलने वाली गाड़ी जिसमें ड्राइवर की जरूरत नहीं होगी और वह खुद चलेंगी | इसे autonomous vehicles भी कहते हैं | इस तरह की गाड़ियां सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, लेजर बीम, सेंसर, कैमरा इन सब की मदद से चलती हैं | पहले दोस्तों इस तरह की कार के बारे में हम लोगों ने सोचा तक नहीं था पर आज ऐसी कार बनाई जा रही है | ऐसे कई सारी कंपनियां हैं जो कि इस तरह की कार बना रही है और टेस्ट कर रहे हैं जैसे की Audi, BMW, Tesla, Google आदि यह सभी कंपनियां Self Driving car बना रही हैं और टेस्टिंग कर रही हैं |



Self Driving Car के  Levels

Self Driving car एक तरह की नहीं होती हैं | Sef Driving Car को 6 लेवल्स में डिवाइड किया गया है | अभी मैं यहां पर आपको एक-एक करके सभी 6 लेवल्स के बारे में बताऊंगा |

Level 0

दोस्तों सबसे पहले हम बात करेंगे लेवल जीरो की | दोस्तों लेवल जीरो के अंदर वह गाड़ियां आती हैं जो पूरी तरह से इंसान के कंट्रोल में होती हैं |हर चीज ऐसी गाड़ियों के अंदर इंसान कंट्रोल करता है |

Level 1

दोस्तों लेवल जीरो के बाद आता है लेवल वन | दोस्तों लेवल वन की गाड़ियों में ADAS होता है यानी कि एडवांस ड्राइवर असिस्टेंट सिस्टम, इसमें स्टेरिंग, एक्सेलरेटर इंसान हैंडल करता है | लेकिन कुछ कुछ चीजें अलग  होती हैं जैसे कि जब आप गाड़ी रिवर्स करते हैं तो अगर कोई ऑब्जेक्ट आता है तो गाड़ी हमें warn करती है और जब गाड़ी बहुत तेज चल रही होती है तो सीट  के vibration से हमें warn किया जाता है कि गाड़ी स्लो करो यह इस तरह की चीजें ADAS कंट्रोल करता है |

Level 2

दोस्तों अब बात करते हैं लेवल 2 की | लेवल 2 की गाड़ियों में आप एक्सेलरेटर और स्टेरिंग ऑटोमेटिक मोड पर रख सकते हो लेकिन आपको थोड़ा अलर्ट रहना पड़ेगा ध्यान देना पड़ेगा |

Level 3

अब बात करते हैं लेवल 3 की | लेवल 3 की गाड़ियों के अंदर सारे सॉफ्ट और क्रिटिकल फंक्शन कार खुद मैनेज करेगी लेकिन कुछ कुछ सिचुएशन में  कार का कंट्रोल आपको हाथ में लेना पड़ेगा |

Level 4

अब बात करते हैं level-4 की | इसमें सारे फंक्शन ADAS कंट्रोल करेगा लेकिन कभी-कभी एक्स्ट्रा क्रिटिकल कंडीशन आ जाएगी तो ड्राइवर को देखना पड़ेगा |

Level 5

अब बात करते हैं level-5 की | इस तरह की कार में सभी क्रिटिकल सिचुएशन कार खुद हैंडल करेगी | इसमें केवल आपको पैसेंजर की तरह बैठना होता है और जहां जाना है बता देना है सब चीजें हर तरह की कंडीशन को कार खुद मैनेज करेगी इस तरह की गाड़ियां अभी बन रही हैं और रिसर्च चल रही है | हम आशा करते हैं कि ऐसे गाड़ियां हमें जल्दी से यूज करने को मिले |


दोस्तों इस तरह की सभी गाड़ियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलती है जो भी कंपनी जो भी डेवलपर यह गाड़ियां बनाते हैं बहुत सारा डाटा इनपुट इमेज रिकॉग्निशन सिस्टम Neural नेटवर्क फॉर मशीन लर्निंग की मदद से यह गाड़ियां बनाते हैं | न्यूरल नेटवर्क डाटा में पेटर्न्स को देखा जाता है जो machine algorithm में काम आते हैं | रास्ते में जो भी साइन बोर्ड आते हैं ट्रैफिक लाइट्स आते हैं इंसान जानवर दूसरी गाड़ियां और भी कोई ऑब्जेक्ट यह सब चीजें गाड़ी में लगे हुए कैमरा डिटेक्ट करते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से react करती है और डिसीजन लेती है के उसको फास्ट जाना है, स्लो जाना है, दाएं जाना है, बाएं जाना है, मुड़ना है, जो भी अलग-अलग कंपनी है जैसे कि गूगल टेस्ला ऑडी बीएमडब्ल्यू इन सब ने अपनी self-driving टेक्नोलॉजी develop की है |

लेकिन सभी टेक्नोलॉजी के अंदर cars के अंदर जो कैमरा होते हैं, radar होते है, sensor होते हैं, उनकी मदद से कार इंटरनल मैप क्रिएट करती है | गूगल के self driving car के प्रोजेक्ट को waymo कहा जाता है जो sensor की मदद से कार के आसपास चल रही चीजों को देखता है और उसके अकॉर्डिंग कार को कंट्रोल करता है जिससे कोई एक्सीडेंट ना हो और कार बिना रुकावट के चल पाए | अगर waymo की बात करें तो उसका प्रोसेस इस तरह है सबसे पहले एक डेस्टिनेशन सेट करना होता है कार का जो सिस्टम है वो पूरे रूट को कैलकुलेट कर लेता है कार के ऊपर एक घूमता हुआ डाटा सेंसर लगा होता है जो कार के आसपास 360 डिग्री में 60 मीटर रेंज में पूरे डाटा को कैप्चर करता है और उसके अकॉर्डिंग कार एक 3D मैप बनाती है  | रडार सिस्टम कार के आगे और पीछे के बंपर पर लगा होता है जो दूरी को आसानी से नाप लेता है जिससे कार हर चीज से डिस्टेंस मेंटेन करके चलती है | इसके अलावा कार में एआई सॉफ्टवेयर हर सेंसर से जुड़ा हुआ होता है यह सॉफ्टवेयर स्ट्रीट व्यू का डाटा और camera द्वारा जो डाटा कैप्चर किया हुआ होता है उसका इनपुट लेता है यह सॉफ्टवेयर गूगल मैप्स मिलकर हर डाटा को एनालाइज करता है तब जाकर कार साइन बोर्ड को ट्रैफिक लाइट को टर्न बोर्ड को अच्छी तरह समझ पाती है self Driving car में गूगल मैप का बहुत बड़ा रोल होता है |


कार में ड्राइवर तो होता नहीं है कोई इंसान तो होता नहीं है  तो कार  मैप के अकॉर्डिंग ही आगे बढ़ती है |

दोस्तों self driving car के कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी हैं | इसका main फायदा यह है कि इसकी  वजह से एक्सीडेंट बहुत कम हो जाएंगे क्योंकि कार इंसान नहीं चला रहा है | दोस्तों एक्सीडेंट के केस में क्या होता है कि कभी-कभी इंसान को गुस्सा आ रहा होता है, कभी-कभी इंसान को नींद आ रही होती है या उसने ड्रिंक कर रखी होती है तो ऐसे केस में एक्सीडेंट हो जाते हैं पर self driving car में ऐसा कुछ नहीं होगा | दोस्तों हम इंसानों के पास एक चीज ऐसी है जो इन रोबोटिक्स या self-driving car के पास नहीं है वह है कॉमन सेंस कार को उतना ही समझ में आएगा जितना उसको सिखाया गया है मतलब जितना उसमें प्रोग्रामिंग किया गया है दोस्तों जितना कार को बताया है और उसके बाहर कुछ हुआ तो दिक्कत हो आ जाएगी इस पर भी टेस्टिंग और रिसर्च चल रही है लेकिन दोस्तों इसका जो सबसे बड़ा नुकसान होगा वह होगा ड्राइवर को क्योंकि ड्राइवर की जॉब खत्म हो जाएगी |

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में इतना ही   |
धन्यवाद 

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Tuesday, August 4, 2020

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Inverter AC क्यों खरीदें ? AC खरीदने से पहले किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

Inverter AC क्यों खरीदें ? AC  खरीदने से पहले 

किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

हेलो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में मैं आपको यह बताऊंगा कि हम AC (Air Conditioner) कौन सा खरीदें inverter या Non inverter और AC (Air Conditioner) खरीदते वक्त हमें किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए यह सब मैं आज आपको इस आर्टिकल में बताऊंगा |

हेलो दोस्तों जब भी आप AC (Air conditioner) खरीदने जाते होंगे तो दुकानदार आपसे कई तरह के सवाल पूछता होगा जैसे कि कौन सा AC (Air Conditioner) चाहिए inverter या  Non inverter AC, Split AC या Window AC, कितने टन का AC चाहिए 1 टन 2 टन या  उससे ज्यादा , कितने स्टार वाला लेंगे 3 स्टार 4 स्टार 5 स्टार | आज मैं आपको यही सब बताऊंगा कि AC खरीदते समय कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए |

Inverter AC kyun khariden



दोस्तों, Inverter और Non inverter AC क्या होता है ? यह मैं पिछले post में बता चुका हूं | आप चाहे तो यहां से पढ़ सकते हैं | दोस्तों, AC दो तरह के होते हैं -  Window AC और Split AC|  

दोस्तों, Window AC में यह  होता है कि यह कमरे के window में लगता है | अगर आपके कमरे में कोई window है तो इस Window AC को वहां पर फिट कर दिया जाता है | Window AC में कुछ हिस्सा कमरे के अंदर रहता है और कुछ हिस्सा कमरे के बाहर और जिन कमरों में खिड़की नहीं होती है वहां पर split AC का इस्तेमाल होता है |

Split AC में दो unit होती हैं एक indoor unit और outdoor unit | Indoor unit कमरे के अंदर लगाई जाती है जो कि cooling देता है यहां से cooling आती है और आउटडोर यूनिट कमरे के बाहर लगाई जाती है खुली हवा में  |Indoor unit से लेकर outdoor unit तक दीवाल में एक छेद करके पाइपलाइन बिछाई जाती है | दोस्तों अब आप भी यह डिसाइड कर लीजिए सबसे पहले कि आपको कौन सा ऐसी लेना है Window AC या Split AC लेना है जब आप यह डिसाइड कर लेंगे उसके बाद आप यह डिसाइड कीजिए कि कितने टन का AC लेना है |

कितने टन का AC लेना  चाहिए  ?


अब आप कहेंगे कि यह ton क्या होता है इसमें क्योंकि AC अलग-अलग ton के आते हैं | अब आप यह कैसे डिसाइड करेंगे कि आपको कितने टन का एसी खरीदना चाहिए देखें दोस्तों यहां टन का मतलब यह है कि 1 टन बर्फ जितना  cooling देगी उतनी ही कूलिंग 1 टन का AC देगा | दोस्तों दूसरे शब्दों में कहें तो जितने ज्यादा टन का AC लेंगे वह उस रूम को उतना ही जल्दी ठंडा करेगा |

 अगर आप यह सोच रहे हैं कि आपका छोटा रूम है और ज्यादा ton का AC लगाएंगे तो रूम जल्दी ठंडा होगा दोस्तों ठंडा तो होगा रूम, लेकिन उतनी ही ज्यादा यह इलेक्ट्रिसिटी लेगा जो 1 टन AC होता है वह कम बिजली खर्च  करता है और जो 3 टन AC होता है वह ज्यादा बिजली खर्च करता है | दोस्तों जब भी किसी AC में ton को   सेलेक्ट करें तो फिर सबसे पहले अपने रूम का साइज चेक करें  | दोस्तों अगर आपके रूम का मेजरमेंट 100 स्क्वायर फीट से कम आ रहा है तो आपको 1 टन से कम का AC चाहिए | दोस्तों अगर आप छोटे कमरे में ज्यादा टन का AC लगा लेंगे तो एक बात बता दूं कि ज्यादा टन का AC महंगा भी आता है और बिजली भी ज्यादा खाता है | अगर आपके रूम का साइज 150 स्क्वायर फीट के बराबर आ रहा है तो आपको 1 टन का AC चाहिए और अगर 200 स्क्वायर फिट का है तो आपको डेढ़ टन का AC चाहिए | दोस्तों इस तरह आप ton select कर सकते हैं ऐसी में |

कितने star का AC खरीदें  ?

दोस्तों AC में ton select करने के बाद आपके सामने सबसे बड़ा सवाल यह आएगा कि कितने स्टार का AC खरीदें | 3 स्टार 4 स्टार 5 स्टार दोस्तों इस star से यह फर्क नहीं पड़ता है कि कम स्टार का कम cooling देगा या ज्यादा स्टार का ज्यादा cooling देगा | दोस्तों एक तरीके से कहा जाए तो जो स्टार है ना वह आपके इलेक्ट्रिसिटी का बिल बताता है मेरा मतलब है कि ज्यादा स्टार वाला AC कम बिजली खाता है और कम स्टार वाला AC ज्यादा बिजली खाता है | दोस्तों AC तो हर कोई खरीद लेता है उसके बाद उसमें इलेक्ट्रिसिटी ज्यादा लगती है क्योंकि कभी-कभी यह भी हो जाता है कि जितने का आपने AC खरीदा कुछ ही महीनों में उससे ज्यादा का तो बिल आ जाएगा |

इसलिए AC में star selection पर  ध्यान दें | दोस्तों अगर आपको AC ज्यादा देर चलाना है तो ज्यादा स्टार वाला AC खरीदें, अगर कम देर चलाना है तो कम स्टार वाला ऐसी खरीदें क्योंकि, मान लीजिए आपको कम स्टार वाला ऐसी 20000 का आ रहा है और ज्यादा स्टार वाला ऐसी 25000 का आ रहा है दोस्तों अगर आप कम देर चलाएंगे ज्यादा स्टार वाला AC, तो फिर आप, यह जो पैसे वसूल नहीं पाएंगे हां अगर आपको ज्यादा देर AC चलाना है फिर फिर आप ज्यादा स्टार वाले AC ले सकते हैं क्योंकि उसमें electricity का बिल कम आएगा और है  जो पैसे इसमें ज्यादा खर्च हुए  हैं वह भी वसूल लेंगे आप |

Inverter AC क्यों खरीदें ?


दोस्तों अगर आप लंबे समय तक AC चलाना चाहते हैं तो फिर आपको Inverter AC खरीदना चाहिए क्योंकि Inverter AC आपके बिजली बहुत बचाएगा लेकिन दोस्तों जो normal AC होते हैं वह 20,000 से मिलने लगते हैं और  inverter AC 30000 से मिलने लग जाते हैं | अगर आप कम देर  AC चलाना चाहते हैं तो फिर आप Inverter AC मत लीजिए क्योंकि अगर कम देर चलाएंगे जो पैसा आपने ज्यादा दिया है inverter AC में वह वसूलने में आपको 5-6 साल लग जाएंगे | दोस्तों अगर आप ज्यादा देर AC चलाना चाहते हैं तो inverter AC लीजिए क्योंकि उससे आप एक-दो साल में जो आपने पैसा ज्यादा दिया है वह वसूल लेंगे तो दोस्तों AC खरीदने से पहले इस बात का ध्यान दीजिए कि आपको AC कितनी देर चलाना  है फिर उसी हिसाब से खरीदें |

दोस्तों, AC खरीदने से पहले यह आपको जरूर देखना है कि जो condenser coil है उस coil में जो metal यूज होगा वह कौन सा है Aluminium है या copper है | अगर आप Aluminium coil का AC लेंगे तो उसकी रिपेयरिंग cost भी ज्यादा है और उसका मेंटेनेंस ज्यादा हो सकता है कुछ सालों में ख़राब भी हो सकती है ? | जो copper coil होते हैं वह long term चलते हैं | copper इसलिए भी यूज़ किया जाता है कि क्योंकि जो अंदर रेफ्रिजरेंट चल रहा है वो copper के लिए बहुत अच्छा है copper उसको अच्छे से ठंडा कर सकता है सीधे मायनों में कहे तो यही कहूंगा कि आपको copper coil का ही AC लेना है Aluminium का नहीं लेना है अगर आप यह सोचेंगे कि कम वाला AC ले तो एक बात ध्यान दें AC खरीदने के बाद उसमें पैसा लगना स्टार्ट होता है तो इसलिए copper coil ही prefer करें |

दोस्तों अब बात आती है कि AC कौन सी कंपनी का खरीदें | Company selection से पहले आप यह पता कर ले कि आपके यहाँ कौन सी कंपनी का सर्विस सेंटर है ? क्योंकि फिर आपको AC खरीदने के बाद सर्विस भी तो करवानी होती है इसलिए AC खरीदने से पहले यह पता कर लो जिस कंपनी का खरीद रहे हो वह कंपनी आपके एरिया में सर्विस देती  है या नहीं |


दोस्तों AC चाहे किसी भी कंपनी का खरीदो लेकिन उसके After sale service  का जरूर पता कर लें कि वह आफ्टर सेल क्या-क्या सर्विस देती है | दोस्तो अब बात आती है कि AC ऑनलाइन ले या ऑफलाइन | दोस्तों सबसे पहली बात आप केवल सस्ता देखकर ऑनलाइन बुक मत कीजिए सबसे पहले तो अपने लोकल एरिया में जाइए वहां पर AC पता कीजिए और उसकी After sale service का पता कीजिए उसके बाद आप ऑनलाइन चेक कर सकते हैं  और अगर आपको सस्ता मिलता है फिर आप ऑनलाइन बुक कर सकते हैं | इसीलिए बिना सोचे समझे सस्ता देखकर ऐसे ही ऑनलाइन बुक मत कीजिएगा क्योंकि हो सकता है आपने बुक तो कर लिया AC, आ गया लेकिन इंस्टॉलेशन के लिए कोई नहीं आया तो इसीलिए कोई भी AC खरीदने से पहले उसकी after sale service का जरूर पता करें | दोस्तों AC के साथ आप stablizer जरूर लें क्योंकि हमारे घरों में वोल्टेज ऊपर नीचे होता रहता है | तो उससे AC खराब होने का chance रहता है तो इसलिए AC के साथ stablizer जरूर लें | दोस्तों अब तो आप समझ चुके होंगे कि AC खरीदने से पहले आपको किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए दोस्तों इसके अलावा अगर आपके मन में कोई सवाल हो तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं |

धन्यवाद 

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Wednesday, July 29, 2020

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Inverter AC क्या है ? Full Explanation in hindi

Inverter AC क्या है ? Full Explanation in hindi

हेलो दोस्तों, आज के इस टॉपिक में मैं आपको बताऊंगा Inverter AC के बारे में कि inverter AC क्या है और Inverter AC लेने के फायदे क्या है ? आज मैं आपको  Inverter AC  की पूरी जानकारी दूंगा | Inverter AC के बारे में सब कुछ बताऊंगा, चलिए दोस्तों फिर शुरू करते हैं -

Inverter AC क्या है ?

Inverter AC, दोस्तों Inverter शब्द सुनकर लोगों के दिमाग में यह आता है कि मतलब जो घर पर इस्तेमाल  करते हैं  inverter उसका ख्याल आता है लोगों को, जो कि बिजली की सप्लाई  के लिए इस्तेमाल  किया जाता है और जब Inverter AC लोग सुनते हैं तो उन्हें यह लगता है यह AC इनवर्टर से चलता होगा इसीलिए इसे Inverter Ac बोलते हैं, ऐसा कई लोगों को लगता है लेकिन यह है नहीं अब मैं आपको बताऊंगा कि inverter AC क्या है ? दोस्तो इनवर्टर एक टेक्नोलॉजी है जो कि अब AC में आने लगी है, चलिए मैं आपको इनवर्टर एसी के बारे में बताता हूं |

Inverter AC क्या है ? Full Explanation in hindi, inverter AC
Inverter AC क्या है ? Full Explanation in hindi


दोस्तों जैसे कि inverter हमारे घरों में बिजली की सप्लाई mainain करता है वैसे ही Inverter AC हमारे घरों में coolong को maintain किए रहता है | दोस्तों, Inverter AC हमारे घरों में temperature को बहुत अच्छे से maintain करके रखता है |

दोस्तों, जो Normal AC होता है उसमें हम जब कोई temperature सेट कर देते हैं फिर वह AC रूम के temperature को उसी सेट किए गए temperature के बराबर ले जाता है फिर जब रूम का temperature सेट किए गए temperature के बराबर हो जाता है फिर Normal AC में Compresser बंद हो जाता है | फिर जब रूम का teperature ज्यादा हो जाता है तो normal AC में फिर compresser start होता है cooling के लिए, अगर दूसरे शब्दों में समझाऊं तो हम लोग यह कह सकते हैं कि मान लीजिए हमारे रूम का temperature है 35 डिग्री हमने  normal AC में सेट कर दिया 25 डिग्री टेंपरेचर, Normal AC उस 35 डिग्री को 25 डिग्री पर ले आएगा फिर Normal AC में compresser बंद हो जाएगा और फिर जब  25 से ज्यादा temperature होने लगेगा मतलब 27-28 डिग्री हो जाएगा फिर compresser फिर से चालू हो जाएगा | Normal AC में इसी तरह काम होता है |

Inverter AC

वहीं अगर हम लोग बात करते हैं करते हैंInverter AC की ,अगर हमने रूम का temperature सेट किया 25 डिग्री तो फिर इनवर्टर एसी रूम के temperature को 25 डिग्री ले आएगा और जब temperature 25 डिग्री हो जाएगा तो Inverter AC में compresser बंद नहीं होगा बल्कि वह धीमे-धीमे चलेगा जिससे कि रूम का temperature 25 डिग्री ही बना रहे | जी हां दोस्तों फिर इस तरह Inverter AC रूम के temperature को maintain करके रखता है और temperature कम या ज्यादा नहीं होने देता है |दोस्तों इस तरह समझ लीजिए कि Inverter AC में inverter technology एक रेगुलेटर की तरह काम करती है मेरा मतलब है जब रूम का temperature maintain हो जाता है तो compresser धीमा कर देती है | फिर इस तरह inverter AC एक ही temperature maintain किए रहता है |

Inverter AC के फायदे 


दोस्तों अब हम बात करते हैं कि  Inverter AC के फायदे क्या है -

  •  सबसे पहली बात Inverter AC में ज्यादा आवाज नहीं आती है |
  •  Inverter AC में compresser चालू बंद नहीं होता है | इस वजह से आप का बिजली बिल कम आएगा | दोस्तों इनवर्टर AC नॉर्मल AC की तुलना में कम बिजली खाता है |
  • Inverter AC temperature को  बहुत ही अच्छी तरह से maintain करके रखता है  इसीलिए हम सबको इनवर्टर एसी खरीदना चाहिए |

दोस्तों भारत में Inverter AC टेक्नोलॉजी के हिसाब से famous नहीं है लेकिन बिजली बचाने के हिसाब से काफी famous है अगर आप भी चाहते हैं कि आपका AC ज्यादा बिजली ना खाएं तो फिर आपको Inverter AC लेना चाहिए |

 ओके दोस्तों आज के आर्टिकल में इतना ही अगर आपको आर्टिकल पसंद आया है तो ज्यादा से ज्यादा शेयर कर दीजिए अगर इस आर्टिकल से जुड़ा आपके मन में कोई सवाल हो तो आप कमेंट में  पूछ  सकते हैं या फिर  हमें मेल कर सकते हैं और  हम से contact कर सकते हैं |


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Thursday, July 23, 2020

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difference between inverter and non inverter ac in hindi | इन्वर्टर AC और नॉन इन्वर्टर AC में अंतर

Difference between inverter and non inverter ac (Air Conditioner) in Hindi

हेलो दोस्तों, आज का आर्टिकल है, Difference between Inverter and non inverter AC है | आज मैं आपको Inverter AC और  non inverter AC के बारे में पूरी जानकारी दूंगा और इन दोनों में क्या अंतर है ये भी बताऊंगा |

दोस्तों, सबसे पहले तो मैं आपको ये बताना चाहता हूँ कि Inverter Ac कोई  ऐसा AC नहीं है जो कि इन्वर्टर से चलता हो बल्कि inverter एक technology है |

दोस्तों जब भी आप किसी दुकान पर AC खरीदने गए होंगे तो दुकानदार आपको बताता होगा कि यह inverter AC है | आज हम इसी के बारे में बात करेंगे Inverter AC के बारे में और इस में अंतर बताएंगे Inverter AC और Non inverter AC में अंतर क्या होता है | दोस्तों AC में main रूप से 3 तरह के कंपोनेंट होते हैं - evaporater, Compressor, Condenser इन तीनों से मिलकर ही AC पूरा काम करता है और कमरे को ठंडा करता है | दोस्तों अगर AC में हम लोग inverter technology की बात करें तो इसका main काम है Compressor के साथ, यह Compressor की performance को increase करता है | दोस्तों inverter AC को समझने से पहले हम लोग Normal AC की बात कर लेते हैं कि normal AC कैसे काम करता है |

difference between inverter and non inverter ac in hindi, inverter Ac
difference between inverter and non inverter ac in hindi


Non Inverter Ac or Normal AC

दोस्तों देखिए पहले हम Normal AC की बात कर रहे हैं इसमें क्या होता है कि जब भी हम AC ऑन करते हैं तो हमें उसमें temperature सेट करना होता है | जैसे कि मान लीजिए हमारे रूम का temperature है  36 डिग्री और हम उसे 25 डिग्री पर करना चाहते हैं तो फिर हम अपने Normal AC में 25 डिग्री temperature सेट कर देंगे |

 जैसे ही हम लोग AC ऑन करेंगे फिर compressor चालू होता है और फिर वह कमरे को धीरे-धीरे ठंडा करता है और फिर कंप्रेसर लगातार चलता रहता है जब तक हमारे रूम का temperature 25 डिग्री नहीं आ जाता है | फिर जैसे ही रूम का temperature 25 से नीचे आता है फिर वैसे ही normal AC में compressor बंद हो जाता है फिर जब जैसे ही रूम का temperature 25 से ऊपर चला जाता है तो फिर Compressor चालू हो जाता है |

 फिर temperature को 25 पर maintain करता है | Normal AC में इसी तरह का प्रोसेस चलता रहता है Compressor ऑन होता है ऑफ होता है और फिर इसी तरह Normal AC रूम का temperature 25 डिग्री बनाए रखता है |दोस्तों यह तो बात रही normal AC की, मतलब Non inverter AC की अगर सीधे मायनों में समझाएं तो बात यह है कि इसमें Compressor on-off होता रहता है | जैसे ही temperature कम हो जाता है Compressor ऑफ हो जाता है और जैसे ही टेंपरेचर ज्यादा होता है तो compressor ऑन हो जाता है फिर normal AC में यह process चलता रहता है |

Inverter AC

दोस्तों अब हम बात करते हैं inverter AC की, मेरा मतलब है inverter technology वाले AC की, देखिए AC में main तो 3 पार्ट होते हैं - Compressor, evaporator और condenser लेकिन inverter AC में एक और चीज होता है वह होता है inverter जो कि हमारे compressor के साथ कनेक्टेड रहता है | जो कि compressor की स्पीड को कंट्रोल करता है अब दूसरे शब्दों में कहें तो यह भी कह सकते हैं कि यह compressor की कैपेसिटी को कंट्रोल करता है  |

दोस्तों जैसा कि पहले normal AC में क्या होता था कि compressor बिल्कुल ऑफ हो जाता था | जब चलता था तो फुल स्पीड में चलता था लेकिन जो inverter AC है अब इसमें इस तरह आप समझ लीजिए कि इसमें एक रेगुलेटर लगा दिया गया compressor के साथ, जिसे हम लोग inverter technology बोल रहे हैं इस तरह आप समझ गए होंगे कि ये compressor की स्पीड को कंट्रोल करता है |

 देखिए दोस्तों मान लीजिए हमने अपनी AC में टेंपरेचर सेट किया है 25 डिग्री और फिर जब हमारे रूम का temperature 25 से कम हो जाएगा फिर inverter AC में यह होगा कि उसमें compressor की  स्पीड कम हो जाएगी, Normal AC में जो compressor होता था उसका temperature कम होने पर बंद हो जाता था | लेकिन inverter AC में compressor बंद नहीं होता है |

जैसे ही  टेंपरेचर 25 से नीचे जाएगा  तो फिर यह रेगुलेटर हमारे कंप्रेसर की स्पीड को कम कर देगा जिससे कि हमारे रूम का temperature 25 डिग्री बना रहे |

Difference between inverter and non inverter ac in hindi

दोस्तों देखिए normal AC में क्या होता था कि compressor बंद हो जाता था | लेकिन inverter AC में  कंप्रेशर बंद नहीं होता है, दोस्तों लेकिन normal AC में बंद हो जाता था |

 ओके दोस्तों अब तो आप समझ चुके होंगे कि inverter AC किस तरह काम करता है लेकिन दोस्तों अब मैं आपको Inverter AC के फायदे बता देता हूं |

  •  सबसे पहली बात inverter AC में बिजली खपत कम होती है | 
  • Inverter AC कम आवाज करता है | 
  • Inverter AC हमारे रूम के टेंपरेचर को accurately maintain करता है | 
  • Inverter AC की लाइफ normal AC के comparision में ज्यादा होती है और यह अधिक दिनों तक खराब नहीं होता |

दोस्तों उम्मीद करता हूं अब तो आपको समझ में आ गया होगा difference between inverter and non inverter ac .

 दोस्तों अगर आपके मन में कोई सवाल है इस आर्टिकल को लेकर तो आप हमसे कमेंट में पूछ  सकते हैं  | आप हमें मेल कर सकते हैं और आप हम से कांटेक्ट कर सकते हैं |
ओके धन्यवाद


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