शनिवार, 10 जुलाई 2021

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सिरिशा बांदला का जीवन परिचय | Sirisha Bandla biography in Hindi, Family, Qualification, Success story

सिरिशा बांदला का जीवन परिचय  | Sirisha Bandla full biography in Hindi

आज के इस आर्टिकल में हम आपको आंध्र प्रदेश की एक बहादुर और जांबाज लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका नाम है सिरसा बांदला। 
आज सिरिशा बांदला का पूरा जीवन परिचय ( Full Biography of Sirisha Bandla in Hindi) आपको बताएंगे। 

सिरिशा बांदला ( Sirisha Bandla) क्यों हैं चर्चा में |

सिरसा बांदला वर्जिन गैलेक्टिक ( Virgin Galactic ) की तरफ से उन अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं जो 11 जुलाई 2021 को रिचर्ड ब्रैंसन ( Richard Branson ) के साथ अंतरिक्ष में जाएँगी। रिचर्ड ब्रैंसन जो कि एक मशहूर बिजनेसमैन तथा वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी के मालिक हैं। 

सिरिशा बांदला कौन हैं ? | Who is Sirisha Bandla in Hindi ?

सिरसा बांदला का जन्म 1987 में आंध्र प्रदेश के गुंटूर सिटी में हुआ था।  उनकी पढ़ाई ह्यूस्टन टेक्सास अमेरिका में हुई है और वे एक एस्ट्रोनॉट हैं।  सिरसा बांदला अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की चौथे इंसान होंगी क्योंकि सबसे पहले राकेश शर्मा गए थे फिर कल्पना चावला गई थी फिर सुनीता विलियम्स गई थी | 


Sirisha Bandla biography in hindi
Sirisha bandla biography in Hindi




अब सिरिशा बांदला भारतीय मूल की चौथी व्यक्ति हैं जो कि अंतरिक्ष में जा रही हैं । इन्होंने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि मैं यूनिटी 22 का हिस्सा बनकर बहुत ही गर्व महसूस कर रही हूं। फिलहाल सिरिशा बांदला वर्जिन ऑर्बिट के वॉशिंगटन ऑपरेशंस का काम संभल रही हैं। 


सिरिशा बांदला का जीवन परिचय  | Sirisha Bandla biography in Hindi

नाम                              -   सिरिशा बांदला ( Siriha Bandla)
जन्म                             -    1987 में 
जन्मस्थान                      -   गुटूंर, आंध्रप्रदेश, भारत
उम्र                               -   34 years
गृहनगर                         -   Houston, Texas, us
जाति                             -   बांदला 
धर्म                               -    हिन्दू ( Hindu )
शौक (Hobbies)           -     ट्रेवलिंग तथा स्विमिंग 
वैवाहिक जीवन             -     अविवाहित ( Unmarried )

सिरिशा बांदला जन्म | Sirisha Bandla born


सिरिशा बांदला ( Sirisha Bandla ) का जन्म सन 1987 में आंध्र प्रदेश ( Andhra Pradesh ) के गुंटूर जिले में हुआ था। 

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सिरिशा बांदला का परिवार | Sirisha Bandla Family


मित्रों अब बात करते हैं सिरसा बांदला के परिवार के बारे में इनके पिता का नाम है मुरलीधर बांदला  और इनकी माता का नाम है अनुराधा बांदला और इनके दादा का नाम है रगैया बांदला और इनकी बहन है प्रत्युषा। 

सिरिशा बांदला की शिक्षा | Sirisha Bandla Qualification

दोस्तों अगर बात करें सिरसा बांदला की पढ़ाई के बारे में तो बताना चाहूंगा कि इन्होंने purdue university से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है और George Town यूनिवर्सिटी से इन्होंने एमबीए किया है।

Sirisha Bandla Carrier and success story in Hindi

अगर बात करें सिरिशा बांदला के carrier के बारे में तो फिर बताना चाहूंगा कि साल 2015 में इन्होने वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी में काम करना शुरू किया। बताना चाहूंगा कि इस कंपनी में काम करने से पहले सिरिशा बांदला टेक्सास में एक एयरस्पेस इंजीनियर के रूप में भी काम किया हैं । 

इसके अलावा वे Commercial Space flight federation में associate director भी रही ।

सिरिशा बांदला  American Astronautical Society & Future Space Leaders Foundation के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी शामिल हैऔर वे  purdue university  के young professional advisory council की सदस्य भी है।

सिरिशा बांदला से जुड़े मुख्य तथ्य | Facts about Sirisha Bandla in Hindi

सिरिशा बांदला का बचपन america  के texas में बीता है और वहां पर सिरिशा बांदला ने बहुत करीब से रॉकेट और स्पेसक्रॉफ्ट देखे। वे जब भी इन्हे देखती तो उनके मन में भी स्पेस के बारे में जानने की इच्छा होती पर उन्होंने ये नहीं सोचा था कि उनका सपना इतनी जल्दी पूरा हो जायेगा । सिरिशा पहले से ही एयरफोर्स में पायलट बनना चाहती थी । लेकिन आँख में कुछ प्रॉब्लम की वजह से  उनका ये सपना पूरा नहीं हो पाया । लेकिन यह कोई नहीं जनता था कि वे एक दिन हमारे देश का नाम रोशन करेंगी। 

Sirisha Bandla Award in Hindi

सिरिशा बांदला को Telugu association of North America द्वारा youth star award देकर सम्मानित किया गया था। 

मित्रों आशा करता हूँ कि आप सबको हमारा आज का आर्टिकल (Sirisha Bandla biography in Hindi) पसंद आया होगा तथा अगर आपके मन में इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सवाल हो तो आप हमें कमेंट तथा मेल करके पूछ सकते हैं। 

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सोमवार, 5 जुलाई 2021

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कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट कैसे डाउनलोड करें | How to download Covid vaccine Certificate Online in Hindi ?

 How to download Covid vaccine certificate Online in Hindi ?

दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम लोग कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट ( Covid Vaccine Certificate ) के बारे में बात करेंगे।  सबसे पहले बताना चाहूंगा कि हमारे देश में कोरोना का टीका लग रहा है | अगर आपने भी अभी तक कोरोना का टीका नहीं लगवाया है तो फिर लगवा लीजिए क्योंकि Covid टीकाकरण का मकसद यह है कि हमारे देश को कोरोना ( Corona ) नाम की बीमारी से मुक्त किया जा सके।  अगर हम इस कोरोना नाम की बीमारी से जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं तो फिर हमें जल्द से जल्द कोरोना का टीका लगवा लेना चाहिए। 

Covid vaccine Certificate, download
Covid vaccine Certificate



दोस्तों कोरोना का टीका लगवा लेने के बाद हमें एक कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट ( Covid Vaccine Certificate ) भी मिलता है।  आज के इस आर्टिकल में हम आपको ये बताएंगे कि कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट क्या होता है और यह क्यों जरुरी है। इसके साथ साथ हम आपको ये भी बताएंगे कि कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट कहाँ से और कैसे डाउनलोड करें ?

कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट क्या है ? | What is Covid Vaccine Certificate in Hindi ?

अब बात आती है कि कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट ( Covid Vaccine Certificate ) क्या होता है  ? 
दोस्तों कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट एक ऐसा सर्टिफिकेट है जिससे कि यह पता चलता है कि आपके कोविड का टीका लग चुका है। अगर दूसरे शब्दों में कहें तो कह सकते हैं कि कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट एक प्रमाण पत्र है जिससे कि यह पता लगता है कि आपके कोविड का टीका लग चुका है। 

कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट क्यों जरुरी है ? | Why Covid Vaccine Certificate is Necessary in Hindi ?

अब बात आती है कि कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट ( Covid Vaccine certification ) क्यों जरुरी है ?

दोस्तों कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट कई कारणों से जरुरी है क्योंकि इसी से पता लगेगा कि कितने लोगों को वैक्सीन लगायी जा चुकी है। कोरोना से पहले हम लोग कहीं पर भी आजादी से घूम लेते थे पर अब अगर आप दूसरे देश या दूसरे राज्य में जाते हैं तो फिर आपको इस कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट की जरुरत पड़ेगी क्योंकि इसी की वजह से आपको दूसरी जगह जाने की अनुमति मिलेगी। अगर आप कहीं नौकरी करने जाते हैं या फिर आप कोई भी सरकारी काम करते हैं तो फिर आपको इस कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट की जरुरत पड़ेगी। 

अब तो आप समझ चुके होंगे कि कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट हमारे लिए क्यों जरुरी है ? 

कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट कैसे डाउनलोड करें ? | Covid vaccine Certificate kaise download karen ?

दोस्तों , अब बात आती है कि कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट कैसे प्राप्त करें और कैसे डाउनलोड करें ?

जब आप कोविड वैक्सीन लगवाएंगे तो फिर ३० मिनट बाद आपके पास एक मैसेज आएगा उस मैसेज पर क्लिक करके आप कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं ।  इसके अलावा आप सीधे  Cowin की वेबसाइट पर जा सकते हैं और फिर  आपको वहां पर signin करना होगा फिर आपके सामने आपकी डिटेल्स तथा सर्टिफिकेट का ऑप्शन आ जायेगा।  फिर आप वहां पर क्लिक करके कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं। आप इस तरह से कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं। 
अगर आप चाहे तो प्लेस्टोर से Cowin की एप्लीकेशन डाउनलोड कर सकते हैं और वहां से भी कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं।
 
अब तो आप समझ चुके होंगे कि हमें कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट ( Covid Vaccine Certificate ) कैसे डाउनलोड करना चाहिए ?

दोस्तों आज के इस आर्टिकल " How to download Corona vaccine Certificate Online in Hindi ? "में इतना ही।  अगर आपके मन में इस आर्टिकल से जुड़ा कोई प्रश्न हो तो फिर आप हमें मेल करके पूछ सकते हैं। 

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शनिवार, 3 जुलाई 2021

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Low Investment Business ideas in Hindi | कम खर्च वाले लघु उद्योग के कुछ आइडियाज

Laghu udyog Best business ideas with low investment in Hindi 

हेलो दोस्तों, जैसे कि आप सब जानते हैं कि अभी कोरोना काल  चल रहा है और इस समय ज्यादातर लोगों की नौकरी जा चुकी है और वह अभी बेरोजगार हैं और इस प्रकार दिन प्रतिदिन ज्यादा से ज्यादा बेरोजगारी बढ़ती जा रही है इसलिए मैं आपके लिए यहां पर कुछ  Low Invetsment Business ideas in Hindi लेकर आया हूं जिन्हें आप कम पैसों में स्टार्ट कर सकते हैं | यह बिजनेस आइडिया काफी अच्छे हैं और आप यह ट्राई कर सकते हैं और यह बिजनेस आइडिया से आप अच्छी खासी इनकम कर सकते हैं और अपने घर परिवार अच्छे से चला सकते हैं |  चलिए मैं आपको यहां पर कुछ Best Business Ideas के बारे में बताता हूं |

Low Investment Business Ideas in Hindi

मित्रों चलिए शुरू करते हैं एक-एक करके अब हम आपको इन बिजनेस आईडियाज के बारे में बताते हैं चलिए शुरू करते हैं :-

Low investment Business ideas in Hindi, Laghu udyog in Hindi
Low investment Business ideas in Hindi



1. Open Breakfast Shop – सुबह के नाश्ते की दुकान

दोस्तों हमारी लिस्ट में जो सबसे पहला Business ideas है, वह है ब्रेकफास्ट शॉप का | Breakfast का बिज़नस एक काफी अच्छा और High Profitable Business Ideas है क्योंकि आजकल लोगों के पास इतना टाइम नहीं होता है कि वे ब्रेकफास्ट तैयार करें | इसलिए लोग सोचते हैं  कि चलो बाहर ही ब्रेकफास्ट कर लेते हैं | इसका कारण यह है कि काफी लोगों को नास्ता बनाना पसंद नहीं और काफी लोगों को नाश्ता बनाना आता  नहीं | इसके अलावा लोग  अक्सर अपने ऑफिस से लेट आते हैं और सुबह देर से सो कर उठते हैं | उनके पास तो बिलकुल समय नहीं होता और वो लोग ज्यादातर बाहर ही नास्ता करते हैं | काफी स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो बाहर रहते हैं वे तो ज्यादातर ही बाहर नाश्ता करते हैं | इसलिए ये एक शानदार बिज़नेस आइडियाज है |

2. ऑनलाइन किराना शॉप (Kirana or Grocery Store):

दोस्तों जैसा कि आप सब जानते हैं अभी कोरोना काल  चल रहा है और इस समय हमें एक दूसरे से दूरी बनाकर रखना बहुत जरूरी है लेकिन उसके साथ-साथ हमें अपने बिजनेस को भी चलाना है जिससे कि हमारा परिवार चलता रहे | इसके लिए सबसे अच्छा बिजनेस है कि आप ऑनलाइन किराना स्टोर खोलें | मतलब आप किराना स्टोर ऑनलाइन ले जाएं ऐसे कई सारे पोर्टल आपको मिल जाएंगे जहां पर आप अपनी किराना का सामान ऑनलाइन भेज सकते हैं फिर जैसे ही आपके पास आर्डर आये फिर आप उसे कस्टमर तक पहुंचा दीजिये | ये भी एक शानदार Low investment Business ideas है |

3. Gift Business Ideas

दोस्तों भारत त्योहारों वाला देश है यहां पर समय-समय पर कई सारे त्यौहार आते रहते हैं और इन त्योहारों पर हम एक दूसरे को गिफ्ट देना पसंद करते हैं | इसलिए आप बनाने का बिजनेस कर सकते हैं इसमें आप त्यौहार के हिसाब से गिफ्ट बनाइए और उन्हें बेच सकते हैं और फिर आप बर्थडे गिफ्ट भी बना सकते हैं और भी तरह-तरह के फंक्शन होते हैं उनके हिसाब से भी गिफ्ट बना सकते हैं तो इस तरह आप गिफ्ट बिजनेस भी कर सकते हैं | कमेंट करके बताइये कि आपको ये Business Ideas कैसा लगा |

4. हेयर सैलून खोलकर (Saloon)

दोस्तों Hair saloon का बिजनेस आपके लिए काफी अच्छा हो सकता है क्योंकि लोग तो हर जगह होते हैं और सर के बाल और दाढ़ी वगैरह बढ़ती रहती है | तो फिर आप यह बिजनेस कर सकते हैं और इसको चालू करने में  बहुत ही कम पैसों की जरूरत पड़ती है आप लो इन्वेस्टमेंट में यह बिजनेस चालू कर सकते हैं और एक अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं | यह एक काफी अच्छा बिजनेस आइडिया है जिसे आप आराम से और अच्छे से कहीं पर भी कर सकते हैं | आपको केवल एक दुकान लेनी है और वहां पर यह बिजनेस चालू कर देना है |


5. घर में ट्यूशन पढ़ाने का व्यवसाय (Home tuition)

दोस्तों, होम ट्यूशन एक आज के समय में काफी अच्छा बिजनेस आइडिया है क्योंकि आज के समय में लोग पढ़ाई को लेकर काफी ज्यादा जागरूक हो चुके हैं और अगर आप किसी भी विषय में माहिर हैं और आपको अच्छी जानकारी है तो आप उसे दूसरों को देखकर मेरा मतलब दूसरों को पढ़ा कर उससे अच्छा खासा पैसा कमा सकते हैं इससे आप दूसरों को शिक्षा भी देंगे और आपको भी फायदा होगा तो मेरी नजर में यह भी एक अच्छा आईडिया है होम ट्यूशन का |

6. Tea Business – चाय का बिज़नेस

दोस्तों भारत में चाय बहुत ही ज्यादा पी जाती है हर कोई चाय पीना पसंद करता है हर किसी की पसंद है | इसका बिजनेस आप  कहीं पर भी कर सकते हैं क्योंकि चाय के शौक़ीन लोग हर जगह मिल जाते हैं इसलिए आप बहुत ही कम पैसों में चाय का बिजनेस कर सकते हैं और अच्छा पैसा कमा सकते हैं | यह हर जगह पर चलेगा क्योंकि चाय पीने के शौकीन हर जगह पर हैं यह एक बहुत ही अच्छा बिजनेस आइडिया है |

7. महिलाओ के लिए जिम :

महिलाओं के लिए जिम यह भी एक अच्छा बिजनेस आइडिया है क्योंकि आज के समय में हर दूसरी महिला का वजन काफी ज्यादा है तो महिलाओं के लिए जिम बहुत अच्छा आईडिया है | महिलाओं के लिए कम मशीनों के साथ भी जिम की शुरुआत की जा सकती है | इसमें केवल कुछ जरूरी मशीनों की आवश्यकता होती है | पुरुष के लिए जिम की अपेक्षा महिलाओं के लिए जिम में कम इन्वेस्टमेंट लगता है इसलिए आप लो इन्वेस्टमेंट में यह  बिजनेस स्टार्ट कर सकते हैं |

दोस्तों यहाँ इस आर्टिकल में मैंने आपको कुछ Business Ideas के बारे में बताया हैं | आपको हमारा ये आर्टिकल  Low Investment Business ideas in Hindi कैसा लगा, कमेंट करके बताइये | यदि आपके मन में इस आर्टिकल से जुड़ा कोई प्रश्न हैं तो फिर आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं |

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गुरुवार, 10 जून 2021

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Affiliate marketing in Hindi

 Affiliate Marketing in Hindi

 हेलो दोस्तों, आज के इस वीडियो में मैं आपको घर बैठे पैसा कमाने का एक अच्छा तरीका बताने  जा रहा हूँ।  जिससे की आप अपने घर बैठ कर आसानी से काम करके अच्छा पैसे कमा सकते हैं।  वो तरीका है Affiliate Marketing - जी हाँ दोस्तों आप इंटरनेट से यह काम करके अच्छा पैसा कमा सकते हैं। आज के इस आर्टिकल में मैं आपको बताऊंगा कि एफिलिएट मार्केटिंग क्या है ( What is Affiliate Marketing in Hindi ? ) । ये भी बताएंगे कि एफिलिएट मार्केटिंग कैसे करते हैं ?

What is Affiliate Marketing in Hindi ?

दोस्तों, जैसे जैसे समय बदल रहा है वैसे वैसे टेक्नोलॉजी भी बढ़ती जा रही है और सबकुछ ऑनलाइन होता जा रहा है।  आज का समय आज का समय Internet Marketing का है ।  आजकल हर काम इंटरनेट से होने लगा है। आजकल नए नए ऑनलाइन पैसे कमाने के तरीके भी आ गए हैं उन्ही में से एक है एफिलिएट मार्केटिंग जिसमे आपको Online marketing करनी होती है |


आज कल लोग इंटरनेट से बहुत सारे काम करने लगे हैं।  यहाँ तक कि आज के समय में आप घर बैठे shopping भी कर सकते हैं। लोग आजकल इधर उधर जाने के वजाये घर पर बैठकर ही ऑनलाइन शॉपिंग करना पसंद करते हैं। 
अब बात करते हैं एफिलिएट मार्केटिंग की।  


Affiliate Marketing , internet marketing
Affiliate Marketing in Hindi



दोस्तों Affiliate Marketing में हमें दूसरी कंपनियों के प्रोडक्ट को प्रमोट करना होता है वो भी ऑनलाइन सोर्स के द्वारा , जैसे कि आप वेबसाइट या फिर और कोई सोशल मीडिया के द्वारा आप कंपनी के प्रोडक्ट को प्रमोट कर सकते हैं और फिर जब कोई व्यक्ति आपके लिंक पर क्लिक करके प्रोडक्ट खरीदेगा तो फिर आपको उस प्रोडक्ट के अकॉर्डिंग कुछ परसेंट कमीशन आपको वह कंपनी देगी जिसके एफिलिएट से आप जुड़े होंगे। 

इस तरह आप घर बैठे एफिलिएट मार्केटिंग करके अच्छा पैसा कमा सकते हैं । 


Affiliate Marketing कैसे करते हैं ?

दोस्तों एफिलिएट मार्केटिंग करने के लिए आपको जिस कंपनी के प्रोडक्ट को आप प्रमोट करना चाहते हैं उसके एफिलिएट प्रोग्राम से आपको जुड़ना होगा । जब आप किसी कंपनी के एफिलिएट प्रोग्राम से जुड़ जायेंगे।  फिर आप उस कंपनी के प्रोडक्ट को अपने विभिन्न ऑनलाइन सोर्स के जरिये उस कंपनी के प्रोडक्ट को प्रमोट कीजिये। 

अब आपके सामने बात ये है कि आप प्रोडक्ट को प्रमोट कैसे करेंगे। दोस्तों आप अपने एफिलिएट प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए अपनी वेबसाइट बना सकते हैं या फिर आप यूट्यूब चैनल बना कर भी आप एफिलिएट मार्केटिंग कर सकते हैं ।  इसके अलावा आप सोशल मीडिया के माध्यम से भी एफिलिएट मार्केटिंग कर सकते हैं। 

लेकिन सभी कंपनी की  Affiliate marketing टर्म्स एंड कंडीशंस अलग अलग रहती हैं। एफिलिएट मार्केटिंग करते समय इस बात का जरूर ध्यान रखें। 


Best Affiliate marketing platforms 

दोस्तों अगर आप ये जाना चाहते हैं कि एफिलिएट मार्केटिंग के लिए सबसे अच्छे प्लेटफार्म कौन से हैं तो फिर मैं यही कहूंगा कि अगर आप beginner हैं तो फिर आप Amazon affiliate  marketing , earn karo , Cuelinks के साथ जुड़ सकते हैं और अपने एफिलिएट मार्केटिंग carrier की शुरुआत कर सकते हैं। 

Conclusion ( Affiliate Marketing in Hindi ? )

दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको हमारे आर्टिकल ( Affiliate Marketing in Hindi ) पसंद आया है और आपको अच्छी जानकारी मिली है।  अगर आपके मन में एफिलिएट मार्केटिंग से जुड़ा हुआ कोई और सवाल है तो फिर आप हमें मेल करके पूछ सकते हैं। 

धन्यवाद  |

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रविवार, 9 मई 2021

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दानवीर कर्ण की कहानी | danveer karn ki kahani

 कर्ण की कहानी  | Karn ki kahani

नमस्कार मित्रों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको महाभारत के एक मुख्य पात्र कर्ण के बारे में बताएंगे | 


कर्ण का जन्म | karn ka janm

शुरुआत करते हैं कर्ण के जन्म के विषय से - कर्ण के जन्म के विषय में कहा जाता है यह कुंती के कुँआरी अवस्था में पैदा हुए थे | कुंती की सेवा से प्रसन्न दुर्वासा ऋषि ने उन्हें एक मंत्र दिया था जिससे वे किसी का आह्वान करके पुत्र रत्न की प्राप्ति कर सकती थी | उत्सुकता वश और मन्त्र की सत्यता जांच करने के लिए कुंती ने सूर्य देव का आह्वान किया और जिसके फल स्वरुप कर्ण कुंती के गर्भ में आ गया | फिर कुंती की कुँआरी अवस्था में ही कर्ण कुण्डल और कवच के साथ पैदा हुआ |


Karn ki kahani
Karn ki kahani



 कुंती ने लोक लाज और समाज के भय के कारण कर्ण को एक टोकरी में रखकर नदी में बहा दिया | वह टोकरी सूत अधिरथ  और उनकी पत्नी राधा को मिली और उन्होंने उसे अपना बेटा मान कर उसका लालन-पालन किया | इसी वजह से कर्ण को सूत पुत्र तथा राधे कहा जाता है |


कर्ण की शिक्षा | karn ki shiksha 

कर्ण को शस्त्र विद्या की शिक्षा गुरु द्रोणाचार्य ने दी थी किन्तु कर्ण की उत्पत्ति के विषय में उन्हें संदेह होने की वजह से उन्होंने उसे ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना नहीं सिखाया | तब कर्ण परशुराम के पास गए और अपने को ब्राह्मण बताकर शस्त्र विद्या सीखने लगे | एक दिन किसी वजह से परशुराम को यह ज्ञात हो गया कि कर्ण ब्राह्मण नहीं है फिर परशुराम ने कर्ण को एक श्राप दिया कि जिस समय तुम्हें इस विद्या की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी उस समय तुम इस विद्या को भूल जाओगे |


कर्ण को श्राप | Karn ko shrap 

कर्ण को जीवन में दो श्राप मिले थे 

पहला श्राप इस प्रकार है कि एक समय कि बात है परशुराम कर्ण कि जंघा पर सर रखकर आराम कर रहे थे तभी थोड़े समय के बाद वहां एक बिच्छू आता है फिर कर्ण सोचता है कि अगर मैं बिच्छू को हटाने की कोशिश करता हूँ  तो गुरु की नींद भंग हो जाएगी  | वह उनकी नींद भंग नहीं करने देना चाहता था फिर उसने बिच्छू को हटाने के वजाये बिच्छू को डांक मारने दिया  और वह बिच्छू के डांक मारने का दर्द सहता रहा |

फिर जब गुरु परशुराम की नींद खुलती है और वे जब यह सब देखते हैं तो फिर उन्हें बहुत क्रोध आता है और वे कहते हैं कि इतनी सहनशीलता केवल एक क्षत्रिये में हो सकती हैं और तुम झूठ बोल कर मुझसे ये सब सीख रहे थे इसलिए मैं तुम्हे श्राप देता हूँ कि जब तुम्हे मेरे द्वारा सिखाई गयी विद्या की सबसे ज्यादा जरुरत होगी तो तुम उस समय ये विद्या भूल जाओगे | 

इतना सब हो जाने के बाद कर्ण गुरु परशुराम को समझाता है की वह खुद नहीं जनता कि वह किस वंश का है तब परशुराम को पछतावा होता है लेकिन दिया गया श्राप वापस नहीं लिया जा सकता तो फिर परशुराम अपना धनुष कर्ण को दे देते हैं |


फिर कुछ वर्षों के बाद 

कर्ण गलती से एक ब्राह्मण की गाय को मार देते हैं  फिर उस ब्राह्मण ने कर्ण को श्राप दिया था कि जिसे तुम मारना चाहते हो तुम उसी के हाथों मारे जाओगे  

इस प्रकार कर्ण को दो श्राप मिले थे |


कर्ण की दुर्योधन से मित्रता | Karn ki duryodhan se mitrta 

अगर हम बात करें दुर्योधन और कर्ण की मित्रता के बारे में मित्रों तो फिर आपको बताना चाहूंगा कि कर्ण शुरुआत से ही अर्जुन के प्रतिद्वंदी थे जिसकी वजह से उसकी दुर्योधन से मित्रता हो गई थी |


कर्ण का विवाह | Karn ka vivah 

एक बार द्रौपदी के स्वयंवर के लिए राजा गण राजा द्रुपद के यहां एकत्र हुए थे | द्रौपदी के स्वयंवर में एक प्रतियोगिता राखी गयी थी जिसके अनुसार जो भी राजा धनुष उठाकर मछली के  प्रतिबिम्ब को देख कर मछली की आँख में निशाना लगाएगा द्रौपदी का विवाह उसी से होगा | उस सभा में किसी ने भी उस धनुष को हिला तक नहीं पाया | लेकिन अर्जुन से पूर्व कर्ण ने उस धनुष को उठा लिया था पर द्रौपदी ने सूतपुत्र होने की वजह से उनसे विवाह करने से मना कर दिया था | 

इसकी वजह से कर्ण ने विशेष रूप से अपने आपको काफी अपमानित समझा |  कर्ण का विवाह पद्मावती नाम की कन्या से हुआ था

कर्ण का दानवीर स्वभाव  | Karn ka danveer swabhav

कर्ण ने पांचों पांडवों का वध करने का संकल्प लिया था पर माता कुंती के कहने पर उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा अर्जुन तक ही सीमित कर दी थी | कर्ण को दानवीर भी कहा जाता है उनकी दानवीर होने के काफी किस्से हैं  | कर्ण के इस दानवीर स्वभाव को देखकर इंद्र उनके पास उनका कवच और कुंडल मांगने गए थे फिर कर्ण ने उन्हें कवच और कुंडल दे दिए थे |


फिर इंद्र ने उन्हें एक बार प्रयोग करने के लिए अपनी एक अमोघ शक्ति दे दी थी | इससे किसी का भी वध किया जा सकता था | कर्ण उस शक्ति का प्रयोग अर्जुन पर करना चाहते थे किन्तु दुर्योधन के कहने पर उन्होंने उस शक्ति का प्रयोग भीम के पुत्र घटोत्कच पर किया था |


महाभारत युद्ध से पहले भगवान् कृष्ण कर्ण  के पास जाते हैं और उसे उसके जन्म की सच्चाई बताते हैं और कर्ण  को समझाते हैं कि उसे पांडवों यानी कि अपने भाइयों की तरफ से युद्ध लड़ना चाहिए | लेकिन कर्ण ने इसका प्रतिरोध करके अपनी सत्य निष्ठा और अपनी सच्ची मित्रता का परिचय दिया |


कर्ण का कुंती को वचन | Karn ka kunti ko vachan

युद्ध होने से पहले कुंती का मन व्याकुल हो उठा, वे नहीं चाहती थी कि कर्ण कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ें और कर्ण का पांडवों के साथ युद्ध हो | इसलिए वे कर्ण को समझाने के लिए कर्ण के पास गई जब कुंती कर्ण के पास गई तो कर्ण उनके सम्मान में खड़े हो गए और उनसे कहा कि आप यहां पहली बार आयी हैं तो इस राधे का सम्मान स्वीकार करें | फिर कुंती ने कर्ण से कहा कि तुम राधे नहीं हो मैं तुम्हारी मां हूं लोक लाज और समाज के भय के कारण मैंने तुम्हें त्याग दिया था |


 तुम पांडवों के बड़े भाई हो इसलिए तुम्हें कौरवों के साथ नहीं बल्कि अपने भाई पांडवों के साथ रहना चाहिए | मैं नहीं चाहती कि भाइयों में परस्पर युद्ध हो | मैं चाहती हूं कि तुम पांडवों के पक्ष में रहो और बड़े भाई होने के नाते राज्य के अधिकारी हो | फिर कुंती ने कहा कि मैं चाहती हूं कि तुम युद्ध जीत कर राजा बनो | तब कर्ण ने कहा माता आपने मुझे त्यागा था, क्षत्रियों के कुल में पैदा होने के बाद भी मैं सूत पुत्र कहलाता हूं | सूत पुत्र कहलाने के कारण द्रोणाचार्य ने मेरा गुरु बनना स्वीकार नहीं किया तथा दुर्योधन ही मेरे सच्चे मित्र हैं | मैं उनका उपकार और मित्रता नहीं भूल सकता किंतु आपका मेरे पास आना व्यर्थ नहीं जाएगा क्योंकि आज तक मेरे पास आया हुआ कोई भी इंसान खाली हाथ नहीं गया है |


 मैं आपको वचन देता हूं कि मैं अर्जुन के सिवाय आपके किसी भी पुत्र पर अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग नहीं करूंगा | मेरा और अर्जुन का युद्ध तो होना ही है और हम दोनों में से किसी एक की मृत्यु निश्चित है | मेरी प्रतिज्ञा है कि आप पांच पुत्रों की ही माता बनी रहेंगी |





कर्ण की मृत्यु | Karn ki mrityu

फिर महाभारत के युद्ध में गुरु द्रोणाचार्य के मारे जाने के बाद युद्ध के १६वे  दिन कर्ण को कौरवों की सेना का सेनापति बनाया गया | अर्जुन को छोड़ कर उसने अन्य पांडवों को जीता किंतु कुंती के अनुरोध की वजह से उसने किसी का भी वध नहीं किया | युद्ध के १७वे  दिन कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धस जाता है फिर कर्ण अपना धनुष रखकर रथ के पहिये को निकालने लगता है | उसी समय भगवान कृष्ण अर्जुन से कर्ण का वध करने को कहते हैं | फिर अर्जुन कर्ण का वध कर देते हैं इस तरह एक महान धनुर्धर , दानवीर योद्धा की मृत्यु हो जाती है |


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मंगलवार, 4 मई 2021

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महाभारत के युद्ध में बलराम जी शामिल क्यों नहीं हुए ?

 महाभारत युद्ध में बलराम ने भाग क्यों नहीं लिया था ?

नमस्कार मित्रों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि बलराम ने महाभारत का युद्ध क्यों नहीं लड़ा अर्थात  मेरे कहने का मतलब है कि बलराम जी महाभारत के युद्ध में शामिल क्यों नहीं हुए थे ? आज इसी के बारे में बताएंगे |

 मित्रों, आप भी सोचिए कि आखिर क्यों बलराम जी ने अपने भाई कृष्ण भगवान के साथ महाभारत का युद्ध नहीं लड़ा ? ऐसी क्या वजह रही होगी और अगर बलराम जी कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ना चाहते थे तो उन्होंने कौरवों की तरफ से भी युद्ध नहीं लड़ा, ऐसा क्यों ?

बलराम ने महाभारत का युद्ध क्यों नहीं लड़ा ?


 मित्रों, आपको यह तो पता ही होगा कि भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जो शेषनाग के अवतार थे, कंस द्वारा देवकी की 6 संतानों के वध के बाद शेषनाग बलराम के रूप में देवकी की कोख से पैदा हुए और उनके जन्म से कुछ समय पहले ही वासुदेव की पहली पत्नी रोहिणी जी वासुदेव और देवकी से मिलने कारागार गई तथा उन्होंने अपनी योग शक्ति से बलराम को अपने गर्भ में सुरक्षित कर लिया |



mahabharat ke yudh me balram ne bhag kyun nahin liya
Balram ne mahabharat ka yudh kyun nahin lada ?



 मित्रों, वैसे बलराम जी को कौन नहीं जानता - सभी जानते हैं | भगवान कृष्ण जहां अपने शांत स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे और वहीँ  बलराम अपने क्रोध स्वभाव के लिए, वैसे भी बलराम शेषनाग के अवतार थे और नागवंशी क्रोधी स्वभाव के जाने जाते हैं | बलराम जी ने यदुवंशियों के संहार के बाद अपना देह का समुद्र तट पर त्याग दिया था और अपने धाम लौट गए थे |

 बलराम की शक्ति जानते हुए जरासंध को बलराम ही अपने लायक प्रतिद्वंदी नजर आते थे अगर भगवान कृष्ण की योजना जरासंध का वध भीम द्वारा करवाना ना होता तो फिर बलराम ही जरासंध का वध कर देते | बलराम अत्यधिक  बलशाली थे फिर भी उन्होंने महाभारत के युद्ध में ना लड़ने का निर्णय  क्यों किया | इसकी वजह क्या थी ?

आखिर ऐसा क्या कारण था जिसकी वजह से बलराम युद्ध करने के स्थान पर तीर्थ यात्रा चले गए |

मित्रों, आपको यह तो पता ही होगा कि महाभारत के युद्ध में हर जगह के छोटे बड़े राजाओं ने भाग लिया | कौरवों के साथ श्री कृष्ण की नारायणी सेना सहित 11 अक्षौहिणी सेना थी वही पांडवों के पास केवल 8 अक्षौहिणी सेना थी और निशस्त्र भगवान् कृष्ण थे | 

तो ऐसे में बलराम ने युद्ध ना करने का निर्णय लिया और तीर्थ यात्रा पर निकल गए और तो और उन्होंने भगवान कृष्ण को भी यह सुझाव दिया कि वे युद्ध में शामिल ना हो क्योंकि दोनों ही पक्ष हमारे संबंधी हैं और किसी एक का पक्ष लेना दूसरे के साथ अन्याय करना होगा दोनों ही पक्ष अधर्म कर रहे थे | अगर हम इसमें शामिल हुए तो वह भी अधर्म कहलाएगा और बलराम भैया दुर्योधन को वचन दे चुके थे कि कृष्ण युद्ध में शस्त्र नहीं उठाएंगे इसीलिए भगवान कृष्ण ने उनके वचन का मान रखते हुए युद्ध में बिना शस्त्र  के भाग लिया और अर्जुन के सारथी बन गए | 

 भगवान कृष्ण ने बलराम को भी समझा दिया कि धर्म स्थापना के लिए युद्ध का होना बहुत ज्यादा आवश्यक है और रही बात संबंधों की तो एक पक्ष सेना को चुने और एक पक्ष मुझे चुन ले | जब दुर्योधन को यह पता चला कि कृष्ण भगवान युद्ध में शस्त्र नहीं उठाएंगे तो दुर्योधन ने सेना का ही चुनाव किया | लेकिन भगवान कृष्ण ने निशस्त्र ही पांडव सेना को विजय दिलवा दी | इस प्रकार उन्होंने बलराम के वचन का मान रखा और युद्ध पूरा किया |

मित्रों, एक प्रश्न धर्म का होता है और जहां धर्म होता था भगवान कृष्ण वहां खड़े हो जाते थे चाहे उनके सामने उनके अपने ही क्यों ना हो | मैं आपको बताना चाहूंगा कि ग्रंथों में एक घटना का वर्णन मिलता है कि जिसमें कि युद्ध से 1 दिन पूर्व बलराम जी पांडवों की छावनी में पहुंचे और उन्हें देख पांडव पक्ष में सभी लोग काफी प्रसन्न हुए और सभी पांडवों ने उनका स्वागत किया और सबका अभिवादन स्वीकार करते हुए बलराम युधिष्ठिर जी के पास बैठे |

सबको यह लग रहा था कि बलराम जी ने अपना निर्णय बदल लिया होगा | लेकिन बलराम बहुत ही दुखी मन से कहने लगे के इस युद्ध में मुझे कोई रुचि नहीं है | सभी लोग आपस में लड़कर मूर्खता कर रहे हैं और मेरे लिए पांडव और कौरव दोनों ही प्रिय हैं |इसलिए मैं युद्ध में भाग नहीं लूंगा, नहीं तो यह अन्याय होगा | भीम और दुर्योधन दोनों ही मुझसे गदा सीख चुके हैं |

 दोनों ही मेरे अपने हैं और इन दोनों को आपस में लड़ते हुए देख कर मुझे अच्छा नहीं लगेगा | फिर बलराम जी बोले, इसलिए मैं तीर्थ यात्रा पर जा रहा हूं यह कहे कर बलराम ने सब से विदा ली और तीर्थ यात्रा पर निकल गए | मित्रों यही कारण था कि जिसकी वजह से बलराम जी ने महाभारत के युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था मित्रों अब तो आप समझ चुके होंगे कि महाभारत के युद्ध में बलराम ने भाग क्यों नहीं लिया था |

जय श्री कृष्णा ||

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सोमवार, 12 अप्रैल 2021

Prabhat

Shri Krishna के देह त्याग के बाद उनके सुदर्शन चक्र ( Sudarshan Chakra ) का क्या हुआ ?

 सुदर्शन चक्र | Sudarshan Chakra


नमस्कार मित्रों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको Sudarshan Chakra से जुड़ी बातें बताएंगे कि भगवान Krishna के देह त्याग करने के बाद उनका सुदर्शन चक्र कहां गया और आज आपको सुदर्शन चक्र से जुड़ी काफी रोचक जानकारी प्राप्त होंगी |

आज के समय में Sudarshan Chakra के बारे में काफी लोगों ने सुना है | सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का एक ऐसा अस्त्र है जिसका प्रहार कभी खाली नहीं जाता | सुदर्शन चक्र की खासियत यह थी कि अगर एक बार भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र का वार कर दिया तो वह सुदर्शन चक्र अपना काम पूरा करके ही भगवान विष्णु के पास वापस आता था | हम सभी लोग यह भी जानते हैं कि सुदर्शन चक्र भगवान krishna के भी पास था भगवान कृष्ण विष्णु के ही अवतार थे |


Sudarshan Chakra
Sudarshan Chakra



 भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से काफी ऐसे काम किए पृथ्वी पर, जो कि पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए काफी जरूरी थे | मित्रों आज के समय में ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि भगवान कृष्ण के देह त्याग करने के बाद उनके सुदर्शन चक्र का क्या हुआ और कहाँ गया सुदर्शन चक्र |

Shri Krishna के देह त्याग के बाद उनके Sudarshan Chakra का क्या हुआ ?


मित्रों, महाभारत काल में भी Sudarshan Chakra का जिक्र बहुत बार हुआ है | सबसे पहले जिक्र हुआ था शिशुपाल की कहानी के दौरान, शिशुपाल भगवान कृष्ण का ही कोई रिश्तेदार था लेकिन भगवान कृष्ण ने उसे वचन दिया था कि वह उसकी १०० गलतियों को  माफ करेंगे और फिर जैसे ही शिशुपाल ने १०१ गलती की फिर भगवान् krishna ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया |

 दूसरी बार सुदर्शन चक्र का जिक्र हुआ था इंद्र और अर्जुन के युद्ध के दौरान, इंद्र ने गुस्से में अर्जुन के ऊपर बज्र से प्रहार कर दिया था और इधर अर्जुन ने भी दिव्यास्त्र से इंद्र के ऊपर प्रहार कर दिया था | फिर भगवान कृष्ण ने दोनों के प्रहार को रोकने के लिए सुदर्शन चक्र चलाया और दोनों का ही वार खाली चला गया | 

इससे यह पता चलता है कि भगवान श्री कृष्ण ने जिस किसी कार्य के लिए सुदर्शन चक्र का प्रयोग करते थे वह कार्य जरूर पूरा होता था | अब बात आती है कि सुदर्शन चक्र गया कहाँ , यह सब जानने के लिए पहले तो हमें यह अच्छी तरह से जानना होगा कि सुदर्शन चक्र क्या था ?

मित्रों शिव पुराण के अनुसार भगवान् शिव ने भगवान् विष्णु को सुदर्शन चक्र एक वरदान के रूप में दिया था और कहा था कि आप इसकी मदद से ही सारी दुनिया का पालन करेंगे | भगवान विष्णु ने उनसे यह सुदर्शन चक्र लिया और इस सृष्टि का उद्धार किया |

लेकिन अगर हम ऋग्वेद की तरफ आते हैं तो ऋग्वेद में इस चीज का उल्लेख है कि Sudarshan Chakra एक ऐसी शक्ति है जो भगवान विष्णु यानी कि भगवान कृष्ण के पास थी जिसके इस्तेमाल करने से भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण  समय को रोककर समय के के साथ खेलकर काफी चीजें बदल देते थे | वे समय को रोककर किसी भी असुर या दानव को असहाय कर देते थे और फिर उसकी पराजय हो जाती थी |

 ऋग्वेद के अनुसार सुदर्शन चक्र एक ऐसी शक्ति बताई गई है जिसकी मदद से भगवान कृष्ण समय को रोक देते थे और समय से आगे भी चले जाते थे | 

समय को रोक देने वाला जिक्र महाभारत के युद्ध के दौरान भी हुआ था | भगवान कृष्ण ने समय को रोककर अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था महाभारत युद्ध के समय भगवान krishna ने समय को रोककर युद्ध के दौरान ही भीष्म पितामह को सही ज्ञान दिया था |

 तो दोस्तों हम यह मान सकते हैं कि सुदर्शन चक्र एक ऐसी शक्ति थी जिसकी मदद से भगवान कृष्ण इस तरह के काम करते थे | हमारे लिए यह बिल्कुल सही तरीके से समझ पाना मुश्किल है क्योंकि हम में से किसी ने भी यह देखा नहीं है | 

अगर दूसरे शब्दों में कहें और पुराणों की मानें तो हम यह कह सकते हैं कि सुदर्शन चक्र केवल एक अस्त्र या शस्त्र नहीं था बल्कि वह एक ऐसी शक्ति थी  जिसका उपयोग भगवान् विष्णु या उनके अवतार कर सकते थे | इसीलिए भगवान krishna के देह त्याग करने के बाद उनकी यह शक्ति यानी कि सुदर्शन चक्र पृथ्वी में समा गया था |

पुराणों में यह उल्लेख भी मिलता है कि Sudarshan chakra वापस आएगा और यह तब वापस आएगा जब भगवान कल्कि पृथ्वी पर अवतार लेंगे | भगवान कल्कि अवतार के साथ भगवान बजरंगबली और भगवान परशुराम भी इस पृथ्वी पर हम लोगों के सामने आएंगे और भगवान कल्कि का प्रशिक्षण करेंगे | फिर उसके बाद सुदर्शन चक्र का उपयोग करके भगवान कल्कि इस दुनिया से पापियों का वध करेंगे |

भगवान् कल्कि फिर एक बार सुदर्शन चक्र का प्रयोग करके इस धरती से पाप का विनाश करेंगे |

मित्रों आशा करता हूँ कि आपको Sudarshan Chakra से जुड़ी काफी अच्छी जानकारी मिल चुकी होगी | अगर आपको हमारी ये जानकारी पसंद आयी है तो फिर इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें |

मित्रों अगर आपके मन में हमारे इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सवाल या कोई सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं |

धन्यवाद 

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