Friday, November 6, 2020

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Diwali क्यों मनाते हैं ?

 Diwali or Deepawali 

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में मैं आपको भारत में सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाये जाने वाले त्यौहार Diwali के बारे में बताऊंगा | दोस्तों दिवाली त्यौहार भारत में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है | इस त्यौहार को deepawali भी कहते हैं | दोस्तों इस आर्टिकल में आपको  दिवाली से जुड़ी यह जानकारियां मिलेंगी जैसे कि -

-- दिवाली का महत्व और दीपावली क्यों मनाते हैं ?
-- भारत में दिवाली त्यौहार कैसे मनाया जाता है ?
-- आज के समय में दिवाली का बदलता रूप 
-- दिवाली पूजा सामग्री 
-- दिवाली की पूजा विधि



Happy Diwali




Diwali का महत्व और Deepawali क्यों मनाते हैं ?

दोस्तों भारतीय समाज में दिवाली का काफी अच्छा खासा महत्व है अब हम आपको दिवाली के महत्व और दिवाली क्यों मनाते हैं इसके बारे में बताएंगे |

Diwali का महत्व 


दोस्तों, धर्म चाहें कोई भी हो पर दिवाली का त्यौहार हर इंसान के दिल में ख़ुशी, प्रेम और उत्साह के दिये जलाता है | नए नए कपड़े पहनना तथा घर की साफ़ सफाई करना ये सब इस त्यौहार से जुडी हुई कुछ परम्परायें हैं | दोस्तों वैसे तो दिवाली कार्तिक अमावस्या के दिन आती है परन्तु भारत में ये पूरे ५ दिन मनाई जाती है इसलिए इसे पंच उत्सव भी कहते हैं | मित्रों दिवाली के त्यौहार पर गणेश, लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है | दोस्तों दीपावली की पूजा हमें  पूरे विश्वास और पूरे मन से करनी चाहिए जिससे कि हमारे जीवन में सुखऔर तरक्की हमेशा बने रहें | दिवाली की पूजा को कार्तिक कृष्णा अमावस्या भी कहा जाता है | व्यापारी लोग इसी दिन  अपने बही-खाता लिखना शुरू करते हैं |

Diwali क्यों मनाते हैं ?

मित्रों वैसे तो दिवाली को लेकर काफी कथाएं प्रचलित हैं पर इन सबमे जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं वो है भगवान् श्रीराम जी की कहानी | जो इस प्रकार है - 

भगवान् राम जो कि राजा दशरथ के पुत्र थे | राजा दशरथ की तीन रानियां थी कौशल्या, सुमित्रा, कैकेयी | भगवान् राम इन तीनो में से रानी कौशल्या के पुत्र थे | भगवान् राम के तीन भाई और थे लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन | राजा दशरथ ने कैकेयी को वरदान दिया था जिसके फलस्वरूप कैकेयी ने राजा दशरथ से राम को १४ वर्ष का वनवास तथा भरत को राजगद्दी मांगी थी | इस वजह से भगवान् राम को वनवास जाना पड़ा था और उनके साथ उनके भाई लक्ष्मण और उनकी पत्नी सीता भी गयी थीं | 
वहां जंगल में भगवान् राम के साथ काफी घटनाएं घटीं | फिर एक दिन लंका का राजा रावण सीता जी को उठा ले गया फिर उसके बाद भगवान् राम ने बंदरों की सेना बनायीं और फिर उस सेना को लेकर भगवान् राम ने रावण से युद्ध किया और उस युद्ध में राम ने रावण को मार दिया | 

दोस्तों बुराई पर अच्छाई की इस जीत का साक्षी है दिवाली का त्यौहार | मित्रों रावण का वध करने के बाद जिस दिन भगवान् राम अयोध्या लौट कर आ रहे थे उस दिन अमावस्या की रात थीं मतलब काफी अँधेरा था | भगवान राम को कोई परेशानी न हो और उनके आने ख़ुशी में फिर अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में हर जगह दीप जलाये | 

दोस्तों ये है दिवाली की कहानी एक अन्य कथा deepwali से जुडी हुई इस प्रकार है -

एक समय की बात है, एक बहुत गरीब ब्राह्मण थे उनकी बेटी प्रतिदिन पीपल के पेड़ की पूजा करती थीं | ये सब देखकर माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न  हुई और उन्होंने ब्राह्मण की बेटी को अपने भोजन के लिए घर बुलाया और फिर उसे भोजन सोने की थाली में खिलाया | फिर ब्राह्मण की बेटी बहुत खुश हो गयी फिर घर जाकर उसने अपने पिता जी को ये सब बताया कि उसकी सहेली लक्ष्मी ने उसे सोने की थाली में खाना खिलाया |  

यह सब सुनकर ब्राह्मण समझ गए कि ये लक्ष्मी और कोई नहीं बल्कि विष्णु जी की पत्नी लक्ष्मी हैं |फिर उन्होंने अपनी बेटी से कहा कि बेटी तुम भी अपनी सहेली लक्ष्मी को भोजन के लिए अपने घर पर बुलाओ | फिर उनकी बेटी वापस पीपल के पास गयी और उसने लक्ष्मी को आमंत्रित किया | फिर जब लक्ष्मी घर आने वाली थीं तो ब्राह्मण ने पूरा घर को दिये से सजा दिया | इस तरह के स्वागत से लक्ष्मी जी इतनी खुश हो गयी कि उन्होंने ने वरदान दिया कि जो भी उनकी पूजा दीयों से करेगा उनके घर में कभी भी पैसों की कमी नहीं आएगी |

मित्रों ये है दिवाली से जुड़ी हुई दूसरी कहानी |


भारत में Diwali त्यौहार कैसे मनाया जाता है ?

दोस्तों जब दिवाली का त्यौहार आने वाला होता है तो इसकी तैयारी काफी दिन पहले से ही होने लगती है | दिवाली के त्यौहार में लोग घर की साफ सफाई करते हैं | नए नए कपड़े खरीदते हैं | मित्रों दिवाली दशहरा के २० दिन बाद आती है | दिवाली से पहले धनतेरस का त्यौहार आता  है धनतेरस को सब लोग नए नए बर्तन खरीदते हैं | फिर आता है दिवाली का दिन, उस दिन बच्चे, बड़े, बूढ़े सभी बहुत खुस होते हैं और सुबह से ही दिवाली की तैयारी में लग जाते हैं | 

फिर लोग बाजार जाते हैं वहां से मिठाई, गणेश लक्ष्मी , नए कपड़े, आतिशबाजी इत्यादि लाते हैं | फिर deepwali वाली शाम को लोग नए नए कपड़े पहन कर गणेश लक्ष्मी की पूजा करते हैं और फिर पूरे घर में दीप जलाते हैं | फिर लोग आतिशबाजी चलाते हैं और अपने सगे सम्बन्धियों को मिठाई आदि बाँट कर दिवाली का त्यौहार मनाते हैं | मित्रों इस तरह भारत में दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है पर कुछ राज्यों में थोड़ा बहुत अलग तरीके से भी मनाते हैं दिवाली पर सबका मकसद एक हो होता है खुशियां बांटना |

आज के समय में Diwali का बदलता रूप 

दोस्तों वैसे तो दिवाली खुशियां मनाने और खुशियां बांटने का त्यौहार है पर हमारे समाज में दिवाली मनाने का तरीका बदलता जा रहा है | लोग आजकल दीयों की जगह पर रंग बिरंगी मोमबत्ती का प्रयोग करने लगे हैं इन रंग बिरंगी मोमबत्तियों में काफी केमिकल होता है | लोग बहुत ज्यादा आतिशबाजी का प्रयोग करते हैं जिससे कि हमारे वातावरण में प्रदूषण बढ़ रहा है  मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि आप दिवाली न मनाएं मेरे कहने का मतलब है कि आप ऐसे पटाखे और आतिशबाजी चलाएं जिनमे कम आवाज और कम प्रदूषण हो |

हद तो तब हो जाती है कुछ लोग इस दिन जुआ खेलना तक शुभ मानते हैं | मित्रों ये सब गलत बात है deepwali क्यों मनाते हैं ये सब तो आप लोगों को पता ही होगा पर ये तरीका दिवाली मनाने का हमारे समाज में कहाँ से आया इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है | दोस्तों हमें अपने बच्चों को सही सीख देनी चाहिए और सही तरीके से त्यौहार मनाने के बारे में बताना चाहिए |


Diwali पूजा सामग्री 

हेलो दोस्तों, अब मैं आपको ये बताऊंगा की deepwali की पूजा के लिए हमें कौन कौन सी सामग्री की आवश्यकता होती है | दोस्तों दिवाली की पूजा के लिए हमें चाहिए दो बड़े घी के दिये और इसके साथ साथ ११ छोटे तेल के दिये चाहिए | 

दिये के अलावा हमें चाहिए फूल, गुलाब, कमल , एक छोटी थाली, कलश, गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्ती, एक लाल कपड़ा, चौकी, दक्षिणा तथा पंचरत्न गहना (आपकी इच्छा अनुसार ),  नारियल, पांच चाँदी के सिक्के, चन्दन, कुमकुम, अक्षत ( कुमकुम हल्दी में मिले हुए चावल ) |

दोस्तों इन सब चीजों के साथ साथ हमें चाहिए  इलाइची, लोंग, आम और पान के पत्ते, जनेऊ, दुर्व, मौली, मिठाई, सुपारी, गंगा जल, जल पात्र, जावित्री, खील बताशे, कमलगट्टे, सूखे मेवे, पांच प्रकार के फल, आरती की थाली, सरसों का तेल, धूप, अगरबत्ती और कपूर |

|मित्रों यही वो सामग्री है जो दिवाली पर गणेश लक्ष्मी की पूजा के लिए चाहिए होती है |

Diwali की पूजा विधि

हेलो दोस्तों, अब मैं आपको deepwali पूजा विधि के बारे में बताने जा रहा हूँ | मित्रों, दिवाली को गणेश भगवान् और माता लक्ष्मी जी की पूजा करने के लिए सबसे पहले चौकी पर लाल कपडा बिछाएं फिर उसपर गणेश लक्ष्मी की मूर्ती रखें | माता लक्ष्मी को हमेशा गणेश जी के दाहिने तरफ ही बिठायें और दोनों मूर्ती इस तरह से रखें कि उनका चेहरा पूर्व या पश्चिम की तरफ रहे | अब मूर्ती के आगे रुपये-गहने (इच्छानुसार ) और ५ चांदी के सिक्के रख दें | यही चांदी के सिक्के कुबेर भगवान् को रूप हैं |

अब लक्ष्मी जी के दाहिने तरफ अष्टधल बनायें जिसमे ८ दिशाएं बनायें बाहर की तरफ और फिर जल से भरे कलश को उस पर रख दें और फिर उसके अंदर थोड़ा चन्दन, दूर्व, पंचरत्न, सुपारी और आम या केले के पत्ते डाल कर मौली से बंधा हुआ नारियल उसमे रखें |

फिर जल पात्र में साफ पानी भर के उसमें मौली बांधे और थोड़ा सा गंगाजल उसमें मिलाएं और फिर चौकी के सामने बाकी पूजा सामग्री रखें अब दो बड़े दिए को देसी घी डालकर तैयार करें और 11 छोटे दीयों को सरसों का तेल डालकर तैयार करें और सभी लोगों के लिए बैठने का आसन चौकी के बगल में बना लें |

मित्रों एक बात ध्यान रखें कि ये सभी कार्य शुभ मुहूर्त से पहले ही कर लें और शुभ मुहूर्त से पहले ही घर के सभी लोग नहा धोकर और नए कपड़े पहन कर अपना आसन ग्रहण करें | उसके बाद एक फूल ले और उसे जल पात्र में डुबोकर सभी पूजा सामग्री पर उस फूल से जल का छिड़काव करें और घर के सभी सदस्य पर भी जल का छिड़काव करें | इतना सब हो जाने के बाद आचमन करें और आचमन कभी दाहिने से नहीं करना चाहिए | पहले अपने बाएं हाथ से पानी लें और दाएं हाथ में डालें और फिर दोनों हाथों को साफ़ करें |

फिर ओम केशवाय नमः बोलकर पानी पिए और फिर दोबारा पानी ले और ओम नारायणाय नमः बोलकर जल पिये और जब तीसरी बार पानी ले तो ॐ महादेवाय नमः बोलकर जल पिये | अब फिर से हाथ धो लें अब इसके बाद गणेश लक्ष्मी जी के आस पास रखे हुए दोनों बड़े दियों को जला दें |

फिर तेल के एक दिए को कलश के पास रखें और फिर जला दे और दूसरे दीए को पूर्वजों को याद करते हुए पूजा की जगह पर रखें और फिर तीसरे दिए को अपने घर के दरवाजे पर पूजा के बाद रखें अब इसके बाद धूप अगरबत्ती भगवान को दिखाएं और फिर से एक फूल लेकर पानी में डुबोकर उसके छीटें गणेश जी और लक्ष्मी जी पर डालें और फिर फूल से पानी कुबेर सिक्कों   पर छोड़ दें अब कुछ छुट्टे  फूल गणेश लक्ष्मी जी के पास रखना फिर कुछ छुट्टे फूल कलश और बड़े दिए को चढ़ाएं | फिर थोड़ी सी मौली लेकर कपड़े के रूप में उसे  लक्ष्मी जी की मूर्ति को चढ़ा दें और फिर गणेश जी की मूर्ति को जनेऊ चढ़ाएं और फिर इसके बाद कुमकुम से दोनों में मूर्तियों पर तिलक करें |

फिर चांदी के सिक्के रुपए गहनों को भी कुमकुम से तिलक कर दें फिर अपने आप को और अपने परिवार वालों को भी तिलक करें उसके बाद  गणेश जी और लक्ष्मी जी के चरणों में अक्षत, कमल गत्ते, नारियल, जावित्री लक्ष्मी जी को अर्पित करें | फिर 2 लॉन्ग, इलायची, सुपारी, एक पान के पत्ते पर रखकर गणेश जी को अर्पित करें और इसके बाद खील, बताशे, मिठाई आदि का भोग लगाकर फूल चढ़ाएं | फिर चम्मच से चारों तरफ जल घुमा कर नीचे छोड़ें |


इसके बाद ओम गण गणपताये नमः और ओम mahalaxmay नमः बोलकर परिवार वालों के साथ जाप करें और प्रार्थना करें |अब इसके बाद गणेश जी और लक्ष्मी माता जी की आरती करें | आरती खत्म होने के बाद पहले खुद आरती ले और फिर अपने परिवार को आरती के बाद थाली को गणेश जी और लक्ष्मी जी के पास रख दीजिये | फिर एक चम्मच में पानी लेकर आरती की थाली के पास घुमा कर आरती की थाली के पास पानी गिरा दें और फिर हाथ में फूल और अक्षत ले लें और फिर भगवान गणेश और लक्ष्मी माता जी से यही प्रार्थना करें कि इस पूजा के दौरान अगर कोई गलती हुई तो उसे माफ करना और अपना आशीर्वाद सदा हमारे ऊपर और हमारे परिवार पर बनाए रखना और फिर ओम गण गणपताये नमः और ओम mahalaxmay नमः इस मंत्र का जाप करें |

 फूल और अक्षत को गणेश और माता लक्ष्मी जी के पास रखना | पूजा करने के बाद खुद प्रसाद ले और सभी परिवार वालों को भी प्रसाद बांटे  घर के बड़े इस दिन परिवार वालों को टीका कर मिठाई खिला कर कुछ रुपए आशीर्वाद के रूप में देते हैं फिर पूजा में रखे गए बाकी दियो को जला दें और घर के अलग-अलग जगह पर रख दें | दियों का मुंह अंदर की तरफ नहीं होना चाहिए | फिर बाहर दरवाजे पर और घर के हर एक कोने में दिया रख दें |

दोस्तों ये तो रही diwali की पूजा विधि |
 
दोस्तों अंत में केवल यही कहना चाहूंगा कि जब भी आप कोई त्यौहार मनाएं तो अपने बच्चों को उस त्यौहार से क्या शिक्षा मिलती है ये जरूर बताएं |

ओके दोस्तों आज के इस आर्टिकल में इतना ही ,
धन्यवाद 


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