Friday, July 19, 2019

जीवनदायिनी गंगा को कौन देगा जीवन ?

हमारी जीवनदायिनी गंगा जिसे भागीरथ काफी प्रयत्नों के बाद  पृथ्वी पर लाये थे और जिन्हें भागीरथी के नाम से भी जाना जाता है । हम गंगा को गंगा देवी और गंगा माँ मानते हैं । जब भागीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाये होंगे तो उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा की हम इंसान गंगा का वो हाल करेंगे कि गंगा का पानी न पीने लायक रहेगा और न ही नहाने लायक और न ही किसी और काम के लायक । क्योकि आज कल हम इंसानो ने गंगा को बहुत ज्यादा प्रदूषित कर दिया है । वो भी उस गंगा को जिसे हम माँ और देवी मान कर पूजते हैं । आज के समय में गंगा काफी जगहों पर विलुप्त होने की कगार पर हैं । तो आज के समय में सबसे बड़ा सवाल ये है कि     

    जीवनदायिनी गंगा को कौन देगा जीवन ?


ganga


दोस्तों, हम भारतवासियों के लिए गंगा का काफी धार्मिक महत्व है गंगा हमारे लिए आस्था का प्रतीक है और यही गंगा नदी भारत में काफी लोगों को पानी उपलब्ध करवाती है और आज के समय में वही मोक्ष दिलाने वाली गंगा के अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है । दोस्तों, आज के समय में हमारी जीवनदायिनी गंगा को बचाने कोई भागीरथ नहीं आएंगे और न ही कोई और , जो करना है हम लोगो को ही करना है । गंगा के जल को फिर से पहले कि तरह पवित्र और निर्मल बनाना है ।



गंगा में प्रदूषण
गंगा के साथ जो सबसे बड़ी समस्या है वो है प्रदूषण की । गंगा में जो भी दिक्कते आ रही हैं उन सबका का सबसे बड़ा कारण है प्रदूषण इसी की वजह से गंगा का पानी पीने लायक नहीं रहा और न नहाने लायक और न किसी और काम के लायक । हमारी गंगा नदी हमारे भारत की जीवन रेखा है क्योकि ये काफी लोगों को पानी उपलब्ध कराती है पर आज के समय में स्तिथि बहुत खराब होती जा रही है । आज के समय में गंगा में दिन प्रतिदिन काफी कचड़ा गिर रहा है । फैक्ट्री से निकलने वाला कचड़ा, अस्पताल से निकलने वाला waste material , कपडा मिलों से निकलने वाला कचड़ा आदि ये सब गंगा में प्रदूषण बढ़ा रहे हैं । ऐसा नहीं है कि गंगा में प्रदूषण केवल यही लोग बढ़ा रहे हैं । आज के समय में हर इंसान गंगा में प्रदूषण बढ़ा रहा है । आज के समय में हम सबने कभी न कभी तो गंगा में प्रदूषण बढ़ाया ही है अगर हमने गंगा में कभी अगर प्लास्टिक फेंकी है या किसी और तरह का कोई कचड़ा फैलाया है तो हम सब गंगा में प्रदूषण को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं ।
कारखानों से निकलने वाला जहरीला रसायन गंगा में बिना रोक टोक के गंगा में बहा दिया जाता है जिससे कि हमारी गंगा और ज्यादा प्रदूषित होती जा रही है । गंगा में प्रदूषण बढ़ने का जो एक और सबसे बड़ा कारण है वो हमारी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है । हमारे भारत में ज्यादातर किसी भी शव का दाह संस्कार गंगा किनारे किया जाता है उससे जो अधजले शव होते हैं उन्हें ज्यादातर गंगा में बहा दिया जाता है जिससे कि प्रदूषण बढ़ता है । 


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गंगा को प्रदूषण से बचाने के उपाये

  • सबसे पहेली बात हमें गंगा में किसी भी प्रकार की गन्दगी या कूड़ा कचड़ा नहीं फेकना चाहिए । 
  •  गंगा किनारे से औधोगिकरण कम होना चाहिए ।
  • सभी उद्योगों के अपने अपने waste treatment प्लांट होने चाहिए जिससे की हम waste material को कहीं न कहीं इस्तेमाल करने लायक बना सकें ।
  • हमें organic खेती को बढ़ावा देना होगा क्योकि गंगा किनारे जो खेती होती है उसमे pesticides का प्रयोग बहुत ज्यादा होता है  जो बाद में बह कर गंगा में पहुंच जाता है और गंगा को प्रदूषित करता है ।
  • बैराज में जल सीमित मात्रा में होना चाहिए क्योको अगर बैराज में पानी ज्यादा होगा तो पानी का प्रवाह रुकेगा और प्रदूषण बढ़ेगा ।



दोस्तों हमें गंगा को पहले की तरह फिर से पवित्र और शुद्ध बनाना होगा और हमें ये संकल्प लेना चाहिए की हम कभी भी गंगा में किसीभी प्रकार का कचड़ा नहीं फेकेंगे ।

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दोस्तों अगर आपके पास गंगा को प्रदूषण से बचाने का कोई उपाय है तो कमेंट करके जरूर बताएं ।

दोस्तों इस बात को हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहिए जिससे की हर इंसान गंगा को साफ़ करने में अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाए तो इसलिए इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और संकल्प ले की गंगा में किसी भी प्रकार का कोई कचड़ा नहीं फेंकेंगे ।




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